चेन्नई, 27 फरवरी (भाषा) नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने शुक्रवार को यहां कहा कि भारतीय नौसेना का लक्ष्य 2035 तक 200 से अधिक जहाजों वाले नौसैन्य बल के रूप में परिवर्तित होने का है और 2026 में 15 अतिरिक्त जहाजों को शामिल करने की योजना है।
उन्होंने यहां चेन्नई बंदरगाह पर ‘आईएनएस अंजदीप’ को सेवा में शामिल किए जाने के बाद कहा कि नौसेना का दीर्घकालिक लक्ष्य घटक स्तर पर पोत निर्माण में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करना और 2047 तक पूरी तरह से आत्मनिर्भर बल के रूप में विकसित होना है।
त्रिपाठी ने कहा, ‘‘नौसेना की अभियानगत क्षमता हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे तक फैली हुई है, जिसमें नौसैन्य इकाइयां निगरानी, जलदस्यु रोधी और समन्वित गश्त के लिए लगातार तैनात रहती हैं, जो निरंतर पहुंच और विश्वसनीय अभियान क्षमता को दर्शाती हैं।’’
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा ‘मेक इन इंडिया’ से ‘ट्रस्ट इन इंडिया’ तक आगे बढ़ चुकी है, और ‘‘हमने आत्मनिर्भर भारत को न केवल एक रणनीतिक अनिवार्यता के रूप में बल्कि भविष्य की सुरक्षा की दिशा में एक निवेश के रूप में भी अपनाया है।’’
एडमिरल त्रिपाठी ने जारी पोत निर्माण प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान में ‘ऑर्डर’ वाले सभी 50 जहाजों का निर्माण विभिन्न भारतीय पोत निर्माण केंद्रों में किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘2035 तक 200 से अधिक जहाजों वाली नौसेना बनने की दिशा में आगे बढ़ते हुए, हमारा लक्ष्य आत्मनिर्भरता को घटक स्तर तक ले जाना और 2047 तक पूरी तरह से आत्मनिर्भर बल का निर्माण करना है।’’
नौसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘इस व्यापक योजना के अंतर्गत, वर्ष 2025 के दौरान भारतीय नौसेना ने 12 युद्धपोत और एक पनडुब्बी को शामिल किया। यह गति जारी है तथा 2026 में लगभग 15 अन्य जहाजों को शामिल करने की योजना है, जो एक अभूतपूर्व उपलब्धि होगी और हमारे इतिहास में सबसे अधिक जहाजों को शामिल करने का रिकॉर्ड बनाएगी।’’
‘अंजदीप’ पोत के सेवा में शामिल होने पर उन्होंने कहा कि यह उथले पानी में चलने वाले 16 पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों में से चौथा है और यह विशेष रूप से पूर्वी क्षेत्र के तटीय एवं समुद्री जलक्षेत्रों में देश की पनडुब्बी युद्ध क्षमता को मजबूत करता है।
उन्होंने कहा कि ‘अंजदीप’ उथले पानी वाले अत्याधुनिक सोनार, हल्के टॉरपीडो, पनडुब्बी रोधी रॉकेट और युद्ध प्रबंधन प्रणाली से सुसज्जित है।
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नेत्रपाल रंजन
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