नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने उस महिला के परिवार को दो करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है, जिसकी 2012 में हुई सर्जरी में रोगग्रस्त दाएं गुर्दे के बजाय स्वस्थ बाएं गुर्दे को निकाल दिए जाने के बाद मृत्यु हो गई थी। आयोग ने इस गलत सर्जरी को ‘‘लापरवाही के सबसे गंभीर रूपों में से एक’’ बताया है।
आयोग के अध्यक्ष ए पी साही और सदस्य भरतकुमार पंड्या 56 वर्षीय मृतका शांति देवी के परिवार द्वारा दायर शिकायत पर सुनवाई कर रहे थे। आयोग ने उत्तर प्रदेश के डॉ. राजीव लोचन को घोर चिकित्सा लापरवाही का दोषी पाया।
एनसीडीआरसी ने 18 मई को दिए एक आदेश में कहा, ‘‘हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह लापरवाही के उन सबसे गंभीर रूपों में से एक है जो अदालतों और न्यायाधिकरणों के समक्ष सुनवाई के लिए शायद ही कभी देखने को मिलते हैं।’’
अभियोजन पक्ष के अनुसार, शांति देवी अप्रैल 2012 में पेट दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास गई थीं और उन्हें दाएं गुर्दे के रोगग्रस्त होने का पता चला। लेकिन, सर्जरी में बाएं गुर्दे को निकाल दिया गया।
भाषा शफीक रंजन
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