NCERT ने अचानक बदल दी कक्षा 8वीं की किताब, इस पाठ को शामिल किए जाने को लेकर मचा है देशभर में बवाल, जानिए क्या है माजरा?
NCERT Class 8 Social Science: कक्षा 8 की सोशल साइंस की नई किताब ने देशभर में विवाद खड़ा कर दिया है। न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर सामग्री शामिल होने के बाद एनसीईआरटी को किताब वापस लेनी पड़ी और वितरण रोकना पड़ा।
ncert controversy/ image source: karan bajaj
- कक्षा 8 किताब पर विवाद
- ज्यूडिशियल करप्शन कंटेंट हटेगा
- NCERT ने मानी गलती
NCERT Class 8 Social Science: नई दिल्ली: कक्षा 8 की सोशल साइंस की नई किताब ने देशभर में विवाद खड़ा कर दिया है। न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर सामग्री शामिल होने के बाद एनसीईआरटी को किताब वापस लेनी पड़ी और वितरण रोकना पड़ा। वहीं भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी के बाद अब विवादित अध्याय को दोबारा लिखने की तैयारी है।
कक्षा 8 की सोशल साइंस की नई पाठ्यपुस्तक में ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ विषय शामिल होने पर बढ़े विवाद के बीच एनसीईआरटी ने बुधवार को पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी। एनसीईआरटी ने स्पष्ट किया कि वह भारतीय न्यायपालिका का गहरा सम्मान करता है और विवादित सामग्री का शामिल होना “अनजाने में हुई गलती” है, जिस पर उसे खेद है। संस्था ने कहा कि पाठ्यपुस्तक के संबंधित अध्याय में गलत सामग्री शामिल हो गई थी, जिसे अब वापस लेकर संशोधित किया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय के निर्देश पर पुस्तक का वितरण तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है और विवादित अध्याय को विशेषज्ञ सलाह से पुनर्लेखित किया जाएगा।
Class 8 NCERT Book Issue: लंबित मामलों का बोझ, न्यायाधीशों की कमी जैसे मुद्दे शामिल
एनसीईआरटी ने 24 फरवरी को कक्षा 8 के लिए सोशल साइंस की नई पुस्तक “Exploring Society: India and Beyond – Part 2” जारी की थी, जिसे शैक्षणिक सत्र 2026–27 से पढ़ाया जाना था। इस पुस्तक के अध्याय “The Role of the Judiciary in Our Society” में ‘Corruption in the Judiciary’ शीर्षक से एक खंड जोड़ा गया था, जिसमें न्यायिक प्रणाली की चुनौतियों, जैसे लंबित मामलों का बोझ, न्यायाधीशों की कमी और भ्रष्टाचार के आरोप, का उल्लेख किया गया था। सामग्री में यह भी बताया गया था कि न्यायाधीश आचार संहिता से बंधे होते हैं और न्यायपालिका में जवाबदेही की आंतरिक व्यवस्थाएं मौजूद हैं, जैसे शिकायतों के लिए CPGRAMS तंत्र। पुस्तक में 2017–2021 के बीच इस प्रणाली के तहत प्राप्त 1600 से अधिक शिकायतों का उल्लेख भी था, साथ ही गंभीर मामलों में संसद द्वारा महाभियोग के जरिए न्यायाधीशों को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया का वर्णन किया गया था।
इस मुद्दे ने तब और तूल पकड़ा जब न्यायपालिका के समक्ष इस पर आपत्ति उठाई गई और कहा गया कि कम उम्र के विद्यार्थियों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के संदर्भ में पढ़ाना अनुचित है। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी और यह एक गंभीर मामला प्रतीत होता है। इसके बाद एनसीईआरटी ने पुस्तक की बिक्री और वेबसाइट से उपलब्धता दोनों पर रोक लगा दी। संस्था ने दोहराया कि नई पाठ्यपुस्तकों का उद्देश्य संवैधानिक मूल्यों, संस्थाओं के प्रति सम्मान और लोकतांत्रिक सहभागिता की समझ विकसित करना है, न कि किसी संवैधानिक संस्था की प्रतिष्ठा को कम करना।
एनसीईआरटी ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के तहत तैयार नई पुस्तकों में विषयों को समकालीन संदर्भों के साथ अद्यतन किया गया है, लेकिन विवादित अंश उस उद्देश्य के अनुरूप नहीं था। इसलिए इसे हटाकर पुनर्लेखन किया जाएगा और संशोधित संस्करण शैक्षणिक सत्र 2026–27 शुरू होने से पहले विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाएगा। संस्था ने रचनात्मक सुझावों के लिए खुलेपन की बात दोहराते हुए कहा कि शिक्षा सामग्री तैयार करते समय संवेदनशील संस्थागत संतुलन बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने पाठ्यपुस्तकों की सामग्री समीक्षा प्रक्रिया और संस्थागत संवेदनशीलता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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