भारत होटल्स के साथ लाइसेंस समझौता समाप्त करने का एनडीएमसी का फैसला बरकरार

Ads

भारत होटल्स के साथ लाइसेंस समझौता समाप्त करने का एनडीएमसी का फैसला बरकरार

  •  
  • Publish Date - April 22, 2026 / 10:29 PM IST,
    Updated On - April 22, 2026 / 10:29 PM IST

नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को नयी दिल्ली महानगर पालिका (एनडीएमसी) के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसके तहत उसने बाराखंबा लेन स्थित पांच-सितारा होटल ‘द ललित’ की जमीन के लिए भारत होटल्स लिमिटेड के साथ किए गए लाइसेंस समझौते को समाप्त कर दिया था और उससे लाइसेंस शुल्क के बकाया के रूप में 1,063 करोड़ रुपये से अधिक की मांग की थी।

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने एनडीएमसी की याचिका को स्वीकार करते हुए एकल न्यायाधीश के दिसंबर 2023 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत नगर निकाय के मांग नोटिस और 13 फरवरी 2020 के रद्द करने संबंधी पत्र को खारिज कर दिया गया था।

पीठ ने कहा, “हम विद्वान एकल न्यायाधीश के उस फैसले से सहमत नहीं हैं, जिसके तहत उपर्युक्त रिट याचिकाओं को स्वीकार कर लिया गया था और 13.02.2020 की मांग नोटिस के साथ-साथ 22.04.1982 के लाइसेंस विलेख को समाप्त करने वाले 13.02.2020 के संचार को रद्द कर दिया गया था।”

विवादित भूमि को भारत सरकार द्वारा 1973 में क्षेत्र के पुनर्विकास की योजना के तहत एनडीएमसी को आवंटित किया गया था और यह परिकल्पना की गई थी कि इसके एक हिस्से का इस्तेमाल पांच-सितारा होटल के निर्माण के लिए किया जाएगा।

एनडीएमसी और भारत होटल्स के बीच 22 अप्रैल 1982 को 99 वर्षों की अवधि के लिए एक लाइसेंस समझौता हुआ था, जिसके तहत एक पांच-सितारा होटल और दो वाणिज्यिक टावरों का निर्माण किया जाना था। समझौते में लाइसेंस शुल्क 1.45 करोड़ रुपये प्रति वर्ष निर्धारित किया गया था।

इस बात को ध्यान में रखते हुए कि लाइसेंस समझौते में 33 वर्षों के बाद लाइसेंस शुल्क में संशोधन का प्रावधान था, एनडीएमसी ने होटल संपत्ति का मूल्यांकन करने का आदेश दिया और तदनुसार भारत होटल्स से 90 दिनों के भीतर तीन समान किस्तों में 10,63,74,59,852 रुपये की मांग करते हुए नोटिस जारी किया।

उसी दिन, एनडीएमसी द्वारा लाइसेंस समझौते को समाप्त करने संबंधी एक संचार भी जारी किया गया और भारत होटल्स को 90 दिनों के भीतर परिसर का शांतिपूर्ण कब्जा सौंपने का निर्देश दिया गया।

भाषा पारुल माधव

माधव