नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को अभ्यर्थियों की पहचान गुप्त रखते हुए 20 जुलाई की दोपहर 12 बजे तक नीट-यूजी 2024 के केंद्र और शहर-वार परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने कहा कि वह इस बात का पता लगाना चाहता है कि कथित रूप से दागी केंद्रों पर परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को अन्य स्थानों के अभ्यर्थियों की तुलना में अधिक अंक मिले हैं या नहीं।
पांच मई को हुई परीक्षा के संचालन में गड़बड़ी के आरोपों का समाधान करने का प्रयास करते हुए प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इसे नए सिरे से आयोजित करने का कोई भी आदेश इस ठोस निष्कर्ष पर आधारित होना चाहिए कि कथित लीक “व्यवस्थित” तरीके से हुआ और पूरी प्रक्रिया की शुचिता प्रभावित हुई है।
पीठ में न्यायमूर्ति जे.बी.पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं। पीठ ने अपने आदेश में कहा, “हम एनटीए को निर्देश देते हैं कि वह नीट-यूजी-2024 परीक्षा में छात्रों द्वारा प्राप्त अंकों को प्रकाशित करे, लेकिन छात्रों की पहचान उजागर न करे। परिणाम 20 जुलाई 2024 को दोपहर 12 बजे तक शहर और केंद्रवार घोषित किया जाना चाहिए और एनटीए की वेबसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिए।”
पीठ ने कहा, “हम चाहते हैं कि छात्रों की पहचान गुप्त रखी जाए। आप ‘डमी’ (छद्म) अनुक्रमांक रख सकते हैं। लेकिन हमें केंद्रवार देखना चाहिए कि अंकों का पैटर्न क्या है।”
शीर्ष अदालत प्रतिष्ठित परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोपों के मद्देनजर परीक्षा को रद्द करने, दोबारा परीक्षा कराने और अदालत की निगरानी में जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर 22 जुलाई को फिर से सुनवाई शुरू करेगी।
पीठ ने इस बात पर गौर किया कि याचिकाकर्ताओं के वकील ने प्रस्तुत किया है कि यह उचित होगा कि नीट-यूजी 2024 परीक्षा का परिणाम एनटीए की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाए ताकि उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त केंद्रवार अंकों के संबंध में पारदर्शिता लाई जा सके।
न्यायालय ने यह भी कहा कि सीबीआई द्वारा जांच का जिम्मा संभाले जाने से पहले बिहार पुलिस द्वारा एकत्र की गई सामग्री और उसकी आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की रिपोर्ट 20 जुलाई को शाम पांच बजे तक अदालत में दाखिल की जाए।
पीठ ने विवादों में घिरी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा(नीट)-स्नातक से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि इसके “सामाजिक प्रभाव” हैं।
न्यायालय ने नीट-यूजी से जुड़ी याचिकाओं से पहले सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई स्थगित कर दी और कहा, “लाखों छात्र इसका इंतजार कर रहे हैं।’’
उसने याचिकाकर्ताओं की इस दलील को खारिज कर दिया कि उनके हाथ बंधे हुए हैं, क्योंकि अदालत में दायर सीबीआई की स्थिति रिपोर्ट उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “यह कोई सीलबंद लिफाफा वाली प्रक्रिया नहीं है और हम सभी पारदर्शिता के पक्ष में हैं। सीबीआई ने जो कुछ हमें बताया है, अगर वह सामने आ गया तो शायद जांच प्रभावित हो सकती है। आज भी जांच चल रही है। लोग सतर्क हो जाएंगे।”
पीठ ने अभ्यर्थियों के वकीलों से परीक्षा के आयोजन में व्यापक उन अनियमितताओं के बारे में अपना दावा साबित करने को कहा, जिसमें प्रश्नपत्र लीक होना भी शामिल है, जिसके कारण परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की आवश्यकता हो।
कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नरेन्द्र हुड्डा ने परीक्षा आयोजित करने में “प्रणालीगत विफलता” का दावा करते हुए इसे रद्द करने की जोरदार मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रश्नपत्रों के परिवहन में गड़बड़ी की गई और वे छह दिनों तक हजारीबाग में एक निजी कूरियर कंपनी के कब्जे में रहे।
उन्होंने दावा किया कि हैरानी की बात यह है कि उन्हें ई-रिक्शा में रखकर एक परीक्षा केंद्र पर ले जाया गया, जिसके प्रिंसिपल को बाद में गिरोह में कथित संलिप्तता के लिए गिरफ्तार कर लिया गया।
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ है।
हुड्डा ने अदालत को बताया कि सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की करीब 1.08 लाख सीटों के लिए करीब 23.33 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी।
पीठ ने कहा, “केवल इसलिए कि 23.33 लाख में से केवल 1.08 लाख छात्रों को ही प्रवेश मिलेगा, हम दोबारा परीक्षा का आदेश नहीं दे सकते। दोबारा परीक्षा इस ठोस आधार पर होनी चाहिए कि पूरी परीक्षा प्रभावित हुई है।”
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि प्रश्नपत्र लीक की घटना पटना और हजारीबाग तक ही सीमित थी तथा गुजरात के गोधरा में इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है।
पटना और हजारीबाग में प्रश्नपत्र कथित तौर पर लीक हो गए, जबकि गोधरा में दावा किया गया कि परीक्षा आयोजित कराने वाले एक व्यक्ति ने कुछ अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट भरने के लिए पैसे लिए।
सोशल मीडिया मंच ‘टेलीग्राम’ पर प्रश्नपत्र लीक होने के दावों पर सवाल उठाते हुए पीठ ने कहा, “आपको यह बात ध्यान में रखनी होगी कि ऐसा करने का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर दिखावा करना नहीं था। लोगों ने यह पैसे के लिए किया। इसलिए, यह परीक्षा को बदनाम करने के लिए नहीं था और कोई व्यक्ति पैसे कमाने के लिए ऐसा कर रहा था जो स्पष्ट है। बड़े पैमाने पर लीक के लिए उस स्तर पर संपर्कों की भी आवश्यकता होती है ताकि आप विभिन्न शहरों में ऐसे सभी प्रमुख संपर्कों से जुड़ सकें।”
एनटीए के वकील ने दावा किया कि टेलीग्राम वीडियो से छेड़छाड़ की गई है।
पीठ ने प्रश्नपत्रों को प्रिंटिंग प्रेस से विभिन्न शहरों में स्थित एसबीआई और केनरा बैंक के लॉकर तक पहुंचाने के लिए निजी कूरियर को किराये पर लेने के लिए एनटीए से सवाल किया।
प्रधान न्यायाधीश ने मेहता से पूछा, “आप परीक्षा से राजस्व के रूप में कितना कमाते हैं?” मेहता ने कहा कि ऐसी परीक्षाओं से करीब 400 करोड़ रुपये की आय होती है और व्यय करीब 300 करोड़ रुपये होता है।
उन्होंने पूछा, “श्रीमान सॉलिसिटर, आपने (प्रश्नपत्रों के परिवहन के लिए) एक निजी कूरियर कंपनी को नियुक्त किया है?”
इसके बाद मेहता ने अदालत में दाखिल सीबीआई की स्थिति रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा कि एजेंसी ने प्रिंटिंग प्रेस से लेकर परीक्षा केंद्र तक पूरी श्रृंखला की जांच की है और किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए सात-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली थी।
पीठ ने 100 टॉपरों के बारे में एनटीए के आंकड़ों का हवाला दिया और कहा कि वे आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे विभिन्न राज्यों से हैं।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, “हमारे लिए चिंता की बात यह है कि प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा के बीच कितना समय अंतराल था।”
मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को तय करते हुए पीठ ने कहा कि वह बिहार पुलिस की रिपोर्ट की प्रति चाहेगी, जिसने मामले की शुरुआत में जांच की थी।
सुनवाई के अंत में जब हुड्डा ने अदालत से पूछा कि क्या नीट-यूजी 2024 के लिए काउंसलिंग पर रोक लगाई जा सकती है, तो मेहता ने कहा कि काउंसलिंग में दो-तीन महीने लगते हैं और इसके 24 जुलाई से शुरू होने की संभावना है।
पांच मई को 23.33 लाख से अधिक छात्रों ने 571 शहरों के 4,750 केंद्रों पर नीट-यूजी परीक्षा दी थी। इन शहरों में 14 विदेशी शहर भी शामिल थे
देश भर के सरकारी और निजी संस्थानों में एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष और अन्य संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एनटीए द्वारा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) परीक्षा आयोजित की जाती है। भाषा प्रशांत रंजन
रंजन