नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला शुरू,1000 से ज़्यादा प्रकाशक ले रहे हिस्सा; प्रवेश रहेगा नि:शुल्क

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला शुरू,1000 से ज़्यादा प्रकाशक ले रहे हिस्सा; प्रवेश रहेगा नि:शुल्क

  •  
  • Publish Date - January 10, 2026 / 05:57 PM IST,
    Updated On - January 10, 2026 / 05:57 PM IST

नयी दिल्ली, 10 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में 53वां नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला शनिवार को भारत मंडपम में ‘भारतीय सैन्य इतिहास: वीरता और ज्ञान @75’ थीम के साथ शुरू हुआ, जिसमें 35 से ज़्यादा देशों के 1000 प्रकाशक हिस्सा ले रहे हैं।

अपने इतिहास में पहली बार सभी के लिए मुफ्त प्रवेश के साथ यह पुस्तक मेला अपनी मुख्य थीम के रूप में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की वीरता और ज्ञान का सम्मान कर रहा है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पुस्तक मेले का उद्घाटन करते हुए इसे ‘चर्चाओं का उत्सव और रचनात्मकता का जश्न’ बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘भगवद्गीता में कहा गया है कि इस दुनिया में ज्ञान से ज़्यादा पवित्र कुछ भी नहीं है। किताबें ज्ञान की इस परंपरा का हिस्सा हैं, जो पीढ़ियों, संस्कृतियों को जोड़ती हैं और समाज का मार्गदर्शन करती हैं।’’

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला-2026 आकार और प्रभाव दोनों दृष्टिकोणों से भारत की साहित्यिक जागरूकता का एक बड़ा उदाहरण है।

उन्होंने कहा, ‘‘3000 से ज़्यादा स्टॉल, 1000 से ज़्यादा प्रकाशक और 600 से ज़्यादा साहित्यिक और संपादकीय कार्यक्रमों के साथ, यह दिखाता है कि यह सिर्फ़ एक पुस्तक मेला नहीं है, बल्कि विचारों का संगम और रचनात्मकता का उत्सव है।’’

यह पहली बार है जब थीम पवेलियन की कुछ मुख्य विशेषताओं में अर्जुन टैंक, आईएनएस विक्रांत और एलसीए तेजस की प्रतिकृतियां, 21 परमवीर चक्र विजेताओं को श्रद्धांजलि और बडगाम 1947 से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक प्रमुख युद्धों और सैन्य अभियानों पर सत्रों को शामिल किया गया है।

इस मेले में वंदे मातरम् के 150 साल और सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन पर भी प्रदर्शनियां होंगी।

नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस वार्षिक पुस्तक मेले का उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया, जिनके साथ स्पेन के संस्कृति मंत्री अर्नेस्ट उर्टासुन डोमेनेच, भारत में कतर के राजदूत मोहम्मद हसन जाबिर अल-जाबिर और कतर के संस्कृति मंत्री शेख अब्दुल रहमान बिन हमद बिन जसीम बिन हमद अल थानी भी मौजूद थे।

थीम पवेलियन में 500 से ज़्यादा किताबें, क्यूरेटेड प्रदर्शनियां, पोस्टर, डॉक्यूमेंट्री और इंस्टॉलेशन होंगे, जो भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से प्रेरित है।

प्रधान ने उद्घाटन के अवसर पर कहा कि पुस्तक मेले की थीम साहस और ज्ञान के उन मूल्यों की याद दिलाती है जो राष्ट्र निर्माण के अभिन्न अंग हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘देश की ज्ञान और पढ़ने की लंबी परंपरा को ध्यान में रखते हुए, इस साल पुस्तक मेले ने ‘भारतीय सैन्य इतिहास: वीरता और ज्ञान @75’ थीम को अपनाया है। यह थीम हमें साहस और ज्ञान के उन मूल्यों की याद दिलाता है, जो राष्ट्र निर्माण के लिए अभिन्न हैं। यह प्रदर्शनी देश के सैनिकों को समर्पित है।’’

यह नौ दिवसीय पुस्तक मेला, 10 से 18 जनवरी तक चलेगा, जिसमें 35 से ज़्यादा देशों के 1000 से ज़्यादा प्रकाशक एक साथ आएंगे। इसमें लगभग 1000 वक्ताओं के साथ लगभग 600 साहित्यिक गतिविधियाँ होंगी और उम्मीद है कि यह ‘20 लाख से ज़्यादा आगंतुकों को आकर्षित करेगा।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत पुस्तक प्रकाशन क्षेत्र में तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है, जो ‘‘हमारी ज्ञान प्रणाली की व्यापकता, हमारी भाषाओं और संस्कृतियों की विविधता’’ को दर्शाता है।

प्रधान ने कहा, ‘‘यह भारत की आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक है, जहाँ हम अपनी संस्कृति की ताकत से भारतीय साहित्य को दुनिया के सामने ला सकते हैं।’’

इस मेले में पीयूष मिश्रा, स्मृति ईरानी, ​​हेमा मालिनी, कैलाश सत्यार्थी, रिकी केज, जया किशोरी, दुर्जोय दत्ता, शालिनी पासी और शुभांशु शुक्ला सहित लेखक, वक्ता और जानी-मानी हस्तियाँ शामिल होंगी।

इस बार, अतिथि देश कतर और फोकस देश स्पेन है।

स्पेन के संस्कृति मंत्री अर्नेस्ट उर्टासुन डोमेनेच ने कहा कि पुस्तक मेले में सहयोग भारत-स्पेन द्विपक्षीय सहयोग का हिस्सा है, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को अभिव्यक्त करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब लोग बोल नहीं पाते, तो किताबें बोलती हैं। इसीलिए हमें उनकी ज़रूरत है।’’

स्पेनिश मंत्री ने कहा, ’’हमें पढ़ने के साझा अनुभव को बढ़ाने और वर्तमान समय में इसे विकसित करने में मदद करने की ज़रूरत है।’’

पुस्तक मेले में रूस, जापान, पोलैंड, फ्रांस, अबू धाबी, ईरान, कजाकिस्तान, हंगरी और चिली सहित 35 से ज़्यादा देशों के प्रकाशक, लेखक और सांस्कृतिक संस्थान हिस्सा ले रहे हैं।

इंटरनेशनल पवेलियन में पुस्तकों के विमोचन, बहुभाषी कविता शाम, सांस्कृतिक कार्यक्रम, बच्चों के साहित्य सत्र और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), गेमिंग, माइग्रेशन और विरासत जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

इस साल के पुस्तक मेले में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें 10 इंटरनेशनल बुक फेयर के डायरेक्टर हिस्सा लेंगे, जैसे लीपज़िग बुक फेयर, बोलोग्ना चिल्ड्रन्स बुक फेयर, सियोल इंटरनेशनल बुक फेयर और तुर्किये के तुयाप फेयर्स एंड एग्जीबिशन आदि।

भाषा नरेश नरेश दिलीप

दिलीप