नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) सेना के तीनों अंगों-थलसेना, नौसेना और वायुसेना के लिए भविष्य संबंधी युद्ध पाठ्यक्रम का तीसरा संस्करण दो से 25 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। इसमें उन्नत पाठ्यक्रम शामिल किया गया है, जिसमें सैन्य अभियानों में विशेष विषयों और क्षेत्र-विशिष्ट युद्ध कौशल पर ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
इस पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों, आपूर्ति श्रृंखला संबंधी परेशानियों और भविष्य में अभियानों को प्रभावित करने वाली क्षेत्रीय एवं वैश्विक भू-राजनीति जैसे विषयों के विशेषज्ञ शामिल हैं, जिससे भविष्य में अभियानों की योजना बनाने और उन्हें संचालित करने के लिए रक्षा बलों द्वारा अध्ययन और विश्लेषण किए जाने वाले विषयों की संख्या में विस्तार होगा।
यह पाठ्यक्रम मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (एचक्यू आईडीएस) के तत्वावधान में संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र (सीईएनजेओडब्ल्यूएस) के साथ साझेदारी में आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सितंबर 2024 में आयोजित शुरुआती पाठ्यक्रम की सफलता के साथ तीन सप्ताह के इस विस्तारित कार्यक्रम का उद्देश्य प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान के उस दृष्टिकोण को साकार करना है जिसके तहत अधिकारियों को आधुनिक युद्ध की जटिल चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि दिल्ली छावनी स्थित मानेकशॉ केंद्र में आयोजित होने वाले इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य इस बात की गहन समझ विकसित करना है कि प्रौद्योगिकी युद्ध लड़ने के तरीके को कैसे प्रभावित कर रही है, जिसके लिए ‘‘हमारी सोच, अवधारणाओं, सिद्धांतों, रणनीतियों और तकनीकों तथा रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं (टीटीपी) पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है’’।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण विषयों की गहन पड़ताल, उभरती प्रौद्योगिकियों के व्यावहारिक प्रदर्शन और रक्षा बलों की क्षमताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण संस्थानों के दौरे की सुविधा भी प्रदान करता है।’’
भाषा आशीष नेत्रपाल
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