एनजीटी ने निकोबार में संरक्षित वन भूमि के उपयोग में बदलाव पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया

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एनजीटी ने निकोबार में संरक्षित वन भूमि के उपयोग में बदलाव पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया

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  • Publish Date - August 5, 2026 / 07:33 PM IST,
    Updated On - August 5, 2026 / 07:33 PM IST

नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)ने निकोबार जिले में संरक्षित वन के भूमि उपयोग में बदलाव करने और उसे आवंटित करने के मामले में केंद्र और अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

अधिकरण ने उस वन अधिकारी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर भी रोक लगा दी, जिसने कथित तौर पर इस तरह के आवंटन पर सवाल उठाए थे।

एनजीटी की कोलकाता पूर्वी क्षेत्र पीठ इससे संबंधित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह शामिल है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि निकोबार जिले में संरक्षित वन के तौर पर अधिसूचित की गई जमीन को केंद्र की मंज़ूरी लिए बिना लगातार आवंटित किया जा रहा है और उक्त भूमि के उपयोग मद में बदलाव कर गैर वन किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता नरेश चौधरी की ओर से अधिवक्ता गौरव बंसल द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि इस तरह जमीन का इस्तेमाल बदलने से कई अधिसूचनाओं और नियमों का उल्लंघन हुआ है, जिनमें 1980 का वन (संरक्षण) अधिनियम (जिसे अब वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम के नाम से जाना जाता है) और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह संरक्षित वन नियम, 1986 शामिल हैं।

याचिका के अनुसार, केंद्र सरकार की जरूरी मंज़ूरी के बिना गैर-वन गतिविधियों के लिए वन भूमि के इस्तेमाल में बदलाव से जुड़ी ‘विसंगतियां’ सबसे पहले 10 जून, 2025 के उस पत्र में सामने आईं, जो निकोबार संभाग के संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ)ने अंडमान लोक निर्माण विभाग, कामोर्टा के कार्यकारी अभियंता को लिखा था। यह पत्र निकोबार ज़िले में कई जगहों पर ‘मिशन अमृत सरोवर योजना’ के तहत बारिश के पानी पर निर्भर तालाब बनाने के प्रस्तावित काम के बारे में था।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि जब यह मामला 17 दिसंबर, 2025 और इस साल 27 जनवरी को हुई अंडमान और निकोबार भूमि आवंटन समिति की बैठकों में उठा, तो समिति ने वन (संरक्षण) अधिनियम के तहत अनिवार्य केंद्र की पूर्व मंज़ूरी की शर्त को माने बिना ही जमीन आवंटित करने की सिफ़ारिश कर दी।

याचिका में कहा गया है कि निकोबार जिले के उपायुक्त ने 29 जनवरी, 2026 को पुलिस अधीक्षक को एक पत्र लिखकर ‘‘निकोबार के डीएफओ के आचरण की जांच करने और उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया।’’

एनजीटी ने 29 जुलाई को दिये आदेश में केंद्र और अंडमान-निकोबार केंद्र-शासित प्रदेश सहित विभिन्न पक्षकारों से जवाब तलब किया।

अधिकरण ने इसी के साथ पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि जब तक उसके आदेश के विपरीत कोई और आदेश न मिले, तब तक वह जिला उपायुक्त के पत्र के आधार पर डीएफओ के खिलाफ ‘कोई भी कार्रवाई करने से बचें’।

भाषा धीरज पवनेश

पवनेश