शिमला, तीन मई (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित दवा कंपनी ‘मोरपेन लैबोरेट्रीज लिमिटेड’ के विनिर्माण संयंत्र में कथित तौर पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन को लेकर उसे नोटिस जारी किया है।
यहां जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की प्रधान पीठ ने स्थानीय निवासी लेख सिंह द्वारा दायर एक मूल आवेदन पर सुनवाई के बाद यह संज्ञान लिया।
आवेदक का आरोप है कि कसौली तहसील के तिरोन गांव में संचालित यह दवा इकाई तय सीमा से अधिक ध्वनि प्रदूषण फैला रही है। उनका दावा है कि संयंत्र के जनरेटर और औद्योगिक मशीनें इस अत्यधिक शोर के लिए जिम्मेदार हैं।
अपने आरोपों के समर्थन में आवेदक ने एक ध्वनि निगरानी रिपोर्ट का भी हवाला दिया है।
इसके साथ ही आवेदक ने दवा इकाई पर बिना किसी अनुमति के सिंचाई के पानी को औद्योगिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया है।
सुनवाई के दौरान आवेदक के वकील ने बताया कि मोरपेन लिमिटेड के खिलाफ कसौली के दीवानी न्यायाधीश के समक्ष एक मुकदमा भी दायर किया गया था।
हालांकि, पीठ ने कहा कि यह दीवानी मुकदमा विचारणीय नहीं है क्योंकि ऐसे मामलों की सुनवाई का उचित मंच केवल हरित अधिकरण (एनजीटी) ही है।
अधिकरण ने दवा कंपनी को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
पीठ ने आवेदक को निर्देश दिया है कि वह आवेदन और उससे जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां अन्य सभी प्रतिवादियों को सौंपे और 10 सितंबर, 2026 को होने वाली अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले इसका हलफनामा दाखिल करे।
भाषा सुमित माधव
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