नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के कदम से बिहार की राजनीति में ‘वैचारिक बदलाव’ आ सकता है : दीपांकर

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नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के कदम से बिहार की राजनीति में ‘वैचारिक बदलाव’ आ सकता है : दीपांकर

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  • Publish Date - March 8, 2026 / 06:20 PM IST,
    Updated On - March 8, 2026 / 06:20 PM IST

नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने रविवार को कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का निर्णय राज्य में एक ‘‘वैचारिक बदलाव’’ और राजनीतिक विमर्श में परिवर्तन ला सकता है।

उन्होंने इस घटनाक्रम को ‘‘बिहार की जनता के साथ विश्वासघात’’ करार दिया।

भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में आरोप लगाया कि यह घटनाक्रम भाजपा के अपने सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) पर बढ़ते प्रभुत्व का संकेत देता है और बिहार के राजनीतिक परिदृश्य को बदल सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि इसका मतलब केवल सत्ता पर कब्जा नहीं, बल्कि एक तरह का राजनीतिक बदलाव होगा। इससे न सिर्फ बिहार बल्कि, संभवत: उत्तर भारत में राजनीतिक विमर्श में भी परिवर्तन आएगा।’’

इस घटनाक्रम को ‘‘बड़ा झटका’’ बताते हुए, वामपंथी नेता ने कहा कि जिस तरह से यह सब हो रहा है, वह नीतीश कुमार के प्रति ‘‘बहुत अपमानजनक’’ प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा, ‘‘लोगों को बेशक पता था कि भाजपा अब प्रभावी रूप से सरकार को नियंत्रित कर रही है, लेकिन जिस तरह से यह हो रहा है वह नीतीश कुमार को अपमानजनक तरीके से दरकिनार करने जैसा है।’’

भट्टाचार्य ने कहा कि इस कदम से कई मतदाता ठगा हुआ महसूस कर सकते हैं, क्योंकि गठबंधन ने कुमार के नाम पर जनादेश मांगा था।

जद(यू) प्रमुख कुमार ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की। वह बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं। कुमार ने यह कदम पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनावों में राजग की शानदार जीत के कुछ महीनों बाद उठाया है।

भाकपा (माले) लिबरेशन विपक्षी महागठबंधन का हिस्सा है, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस शामिल हैं।

भट्टाचार्य ने दावा किया कि लोगों को लगता है कि यह एक तरह का तख्तापलट है, जिसे नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द जद(यू) के भीतर से लंबे समय से अंजाम दिया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘जाहिर है जद(यू) के भीतर भी वे देख सकते हैं कि कैसे भाजपा उनकी पार्टी को लगभग निगल रही है। इसलिए यह भाजपा का सत्ता का खेल है।’’

भट्टाचार्य के अनुसार, हालांकि जद(यू) वर्षों से भाजपा के साथ गठबंधन में रही है, लेकिन वह काफी हद तक उस परंपरा से जुड़ी रही, जिसे उन्होंने “सामाजिक न्याय खेमा” कहा।

उन्होंने कहा,‘‘नीतीश कुमार हमेशा कहते थे कि वह सांप्रदायिक ताकतों के साथ समझौता नहीं करेंगे…। अब यह नजरिया बदल जाएगा, और इसका मतलब होगा कि जद (यू) पूरी तरह से भाजपा के वैचारिक नियंत्रण में आ जाएगी।’’

भट्टाचार्य ने कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के पीछे बताए गए कारण पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मानना ​​मुश्किल है कि यह अनुभवी नेता की पुरानी ख्वाहिश थी।

उन्होंने कहा, ‘‘बिहार में दो दशकों तक सत्ता संभालने वाले किसी व्यक्ति के लिए राज्यसभा जाना कोई ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार तो नहीं हो सकता।’’

भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘एक समय उन्हें (नीतीश) प्रधानमंत्री पद का दावेदार माना जाता था और अब हमें बताया जा रहा है कि राज्यसभा जाना उनकी ख्वाहिश थी। इससे ज्यादा बेबुनियाद बात और क्या हो सकती है?’’

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने ‘बुलडोजर शासन’ की तर्ज पर काम करना शुरू कर दिया है।

भट्टाचार्य ने दावा किया, ‘‘विध्वंस शुरू हो गए हैं, भूमि अधिग्रहण चल रहा है… बिहार में आज की तरह महिलाओं ने पहले कभी इतनी असुरक्षा महसूस नहीं की है।’’

राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना पर उन्होंने कहा कि हो सकता है कि यह सुगम तरीके से नहीं हो, खासकर अगर भाजपा अपना मुख्यमंत्री नियुक्त करने की कोशिश करती है।

भट्टाचार्य ने दावा किया, ‘‘जद(यू) के भीतर पहले से ही काफी असंतोष है। अगर भाजपा अपना मुख्यमंत्री थोपना चाहती है, तो मुझे यकीन है कि यह प्रक्रिया बिल्कुल भी सुगम नहीं होगी। यह काफी मुश्किल भरी हो सकती है।’’

भाषा शफीक दिलीप

दिलीप