कोलकाता, 17 मई (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर चौधरी ने रविवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से राज्य सरकार द्वारा पशु वध संबंधी दिशानिर्देशों पर जारी सार्वजनिक नोटिस के संबंध में हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस नोटिस की वजह से विशेष रूप से मुर्शिदाबाद जिले में अल्पसंख्यक समुदाय के बीच ‘‘भ्रम की स्थिति और बेचैनी’’ पैदा हुई है।
चौधरी ने शुभेंदु को लिखे पत्र में कहा कि राज्य सरकार द्वारा 13 मई को ‘‘पशु वध दिशानिर्देशों’’ के अनुपालन से संबंधित जारी किए गए सार्वजनिक नोटिस ने मुर्शिदाबाद में भ्रम और बेचैनी पैदा कर दी है, जहां अल्पसंख्यक समुदाय की आबादी अधिक है।
चौधरी ने व्यावहारिक समाधान सुझाते हुए मुख्यमंत्री से मुर्शिदाबाद जिला प्रशासन को उन विशिष्ट स्थानों की पहचान करने और सीमांकित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया, जहां लोग अपने धार्मिक विश्वास से जुड़े रीति-रिवाजों का पालन कर सकें।
उन्होंने पत्र में लिखा, ‘‘इस प्रकार चिह्नित और सीमांकित स्थानों का उपयोग केवल धार्मिक समूह से संबंधित पारंपरिक अनुष्ठानों के लिए किया जाए। यह दृष्टिकोण नोटिस के कारण उत्पन्न होने वाली असुविधा को दूर करने का एक आदर्श समाधान होगा।’’
सरकार द्वारा 13 मई को जारी नोटिस में दोहराया गया है कि आधिकारिक रूप से जारी फिटनेस प्रमाणपत्र के बिना बैल, बछड़े, गाय और भैंसों का वध नहीं किया जा सकता, और संबंधित प्रमाणपत्र केवल नगरपालिका अध्यक्ष या पंचायत समिति के सभापति द्वारा सरकारी पशु चिकित्सक के साथ संयुक्त रूप से जारी किया जा सकता है।
अधिसूचना के अनुसार, ऐसा प्रमाणपत्र तभी प्रदान किया जा सकता है जब दोनों अधिकारी लिखित रूप में यह दर्ज करें कि पशु या तो काम करने या प्रजनन के उद्देश्यों के लिए 14 वर्ष से अधिक आयु का है, या उम्र, चोट, विकृति या असाध्य बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम हो गया है।
चौधरी ने कहा कि पश्चिम बंगाल एक ऐसा राज्य है जिसमें विविध सांस्कृतिक परंपराओं और धार्मिक प्रथाओं का पालन करने वाले अनेक समूह और समुदाय रहते हैं, इसलिए विभिन्न समुदायों के लोगों को बिना किसी संदेह के अपने सामाजिक-धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने में सक्षम बनाना आवश्यक है।
लोकसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष चौधरी ने शुभेंदु अधिकारी को लिखे गए पत्र में कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि आप हस्तक्षेप करेंगे ताकि जिले में फैल रही बेचैनी और भ्रम की स्थिति को दूर किया जा सके।’’
भाषा धीरज नेत्रपाल
नेत्रपाल