नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत द्वारा परमाणु क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के निर्णय से 2047 तक आण्विक ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने और स्थिर एवं शून्य-कार्बन आधारित बिजली उपलब्ध होने की उम्मीद है।
मिश्रा यहां आईआरएडीई में ‘सतत ऊर्जा संक्रमण – वैश्विक परिप्रेक्ष्य’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने हाल ही में किए गए विधायी प्रयासों के माध्यम से निजी भागीदारी के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को खोलकर एक ऐतिहासिक सुधार किया है। इससे 2047 तक परमाणु क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने और स्थिर, शून्य-कार्बन आधारित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होने की उम्मीद है।’’
मिश्रा ने कहा कि ये ऊर्जा स्रोत में बदलाव को सीधे ऊर्जा सुरक्षा और आयात में कमी के साथ जोड़ते हैं, जिससे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा भारत के विकसित भारत के दृष्टिकोण में निहित है और विकास, प्रतिस्पर्धा, सामाजिक समावेश और ऊर्जा सुरक्षा के लिए केंद्रीय महत्व रखती है।
भाषा धीरज सुरेश
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