महानदी में ‘मध्यम स्तर’ की बाढ़ की आशंका, ओडिशा सरकार ने जारी किया हाई अलर्ट

महानदी में 'मध्यम स्तर' की बाढ़ की आशंका, ओडिशा सरकार ने जारी किया हाई अलर्ट

महानदी में ‘मध्यम स्तर’ की बाढ़ की आशंका, ओडिशा सरकार ने जारी किया हाई अलर्ट
Modified Date: July 30, 2026 / 08:05 pm IST
Published Date: July 30, 2026 8:05 pm IST

भुवनेश्वर, 30 जुलाई (भाषा) ओडिशा में बृहस्पतिवार को भी हाई अलर्ट जारी रहा। राज्य के चार उत्तरी जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी रही जबकि महानदी और उसकी सहायक नदियों में ‘मध्यम दर्जे की बाढ़’ के मद्देनजर अधिकारी तैयारियों में जुटे हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता (इंजीनियर-इन-चीफ) ने कहा कि बृहस्पतिवार रात से अगले 36 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि महानदी में बाढ़ के जल का सबसे अधिक प्रवाह होने की संभावना है।

राउत ने पत्रकारों से कहा, ‘‘हम कटक के पास मुंडाली में 9 लाख से 9.5 लाख क्यूसेक पानी के प्रवाह की उम्मीद कर रहे हैं। बृहस्पतिवार रात से अगले 36 घंटे बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि महानदी में बाढ़ शीर्ष स्तर पर होगी। इस मानसून के दौरान नदी में पानी की यह सबसे अधिक मात्रा होगी।’’

राउत के अनुसार, महानदी प्रणाली में आठ लाख क्यूसेक से अधिक के प्रवाह को मध्यम दर्जे की बाढ़ माना जाता है।

उन्होंने कहा कि खोरधा, पुरी, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर जिलों में महानदी और उसकी सहायक नदियों के तटबंधों की सुरक्षा के लिए संवेदनशील इलाकों में विशेषज्ञों को तैनात किया गया है।

हालांकि, राउत ने कहा कि मुंडाली बैराज ने अतीत में 10 लाख से 12 लाख क्यूसेक तक के प्रवाह को संभाला है।

अधिकारियों ने कहा कि बृहस्पतिवार शाम तक मुंडाली में बहाव 9 लाख क्यूसेक को पार करने की संभावना के साथ, बाढ़ का पानी महानदी और उसकी सहायक नदियों- लूना, करंदिया, चित्रोत्पला, पाइका, सालिया, देवी, कंडाला, कुआखाई, कुशभद्रा, दया और भार्गवी में प्रवाहित होने की संभावना है।

राउत ने कहा, ‘हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि तटबंधों में कोई दरार न पड़े और कोई जनहानि न हो। निचले इलाकों में जलभराव चिंता का विषय बना हुआ है। अतीत में बाढ़ की आपात स्थितियों को संभालने वाले अनुभवी अधिकारियों को संवेदनशील जिलों में तैनात किया गया है।’

उन्होंने आगाह किया कि बाढ़ का चरम स्तर निचले इलाकों को जलमग्न कर सकता है और कुछ हिस्सों में फसलों, सड़कों, पुलों तथा मकानों को नुकसान पहुंचा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘अब जब उत्तरी ओडिशा की नदियों में स्थिति स्थिर हो रही है, तो हमारा ध्यान महानदी और उससे जुड़ी नदियों पर है, जिनकी बड़ी संख्या में सहायक नदियां हैं।’

उन्होंने बताया कि तटबंधों की निगरानी, लोगों को सुरक्षित निकालने की तैयारी और राहत व्यवस्था को तेज कर दिया गया है।

एक अधिकारी ने बताया कि तेल, इब और जीरा नदियों का बाढ़ का पानी भी महानदी में मिल रहा है, जिससे नदी का जलस्तर और तेजी से बढ़ रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, हीराकुंड बांध में जलस्तर 620 फुट दर्ज किया गया, जबकि इसकी पूर्ण जलाशय क्षमता 630 फुट है।

बांध में 3,31,063 क्यूसेक (घन फुट प्रति सेकंड) पानी की आवक हो रही है, जबकि दो फाटकों के माध्यम से 64,109 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि जलस्तर में वृद्धि जारी रही तो बांध के अतिरिक्त फाटक भी खोलने पड़ सकते हैं।

विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल ने महानदी के निचले तटीय इलाकों के जिलाधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा है और क्षेत्र के सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बाढ़ प्रभावित उत्तरी जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया।

उन्होंने कहा कि एक अच्छी खबर यह है कि पूरे ओडिशा और छत्तीसगढ़ तथा मध्य प्रदेश में महानदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश कम हुई है।

मंत्री ने कहा कि प्रशासन हाई अलर्ट पर है और बाढ़ प्रभावित जिलों के सभी अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।

लगातार बारिश के कारण आई बाढ़ ने बालासोर, भद्रक, जाजपुर और मयूरभंज जिलों के कई गांवों को जलमग्न कर दिया है।

प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ से लगभग छह लाख लोग प्रभावित हुए हैं और 1,352 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।

त्वरित राहत कार्य सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को नुकसान का तत्काल आकलन पूरा करने का निर्देश दिया गया है।

मौसम विभाग (आईएमडी) के बारिश के पूर्वानुमान और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने भद्रक, जाजपुर, नबरंगपुर और कालाहांडी जिलों में स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद करने के आदेश दिए हैं।

राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है तथा 1.76 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित लोगों को आश्रय, भोजन और पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए 476 राहत केंद्र खोले गए हैं।

भाषा सुमित पवनेश

पवनेश


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