बेंगलुरु, 28 फरवरी (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने शिक्षकों से एक बेहतर समाज के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह करते हुए शनिवार को कहा कि केवल शिक्षकों के पास ही साधारण व्यक्तियों को असाधारण नागरिकों में बदलने की शक्ति है।
सिद्धरमैया ने त्रिपुरा वासिनी पैलेस ग्राउंड में राज्य स्तरीय शैक्षिक महा सम्मेलन और कर्नाटक राज्य प्राथमिक विद्यालय शिक्षक संघ के स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन करते हुए कहा कि शिक्षक राष्ट्र के भविष्य के निर्माता हैं।
उन्होंने कहा, “स्वतंत्रता के समय साक्षरता दर मात्र 12 से 15 प्रतिशत थी। आज यह बढ़कर 74 प्रतिशत हो गई है। हमें यह प्रश्न करना चाहिए कि क्या हम सामाजिक मुद्दों से संबंधित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। यह शिक्षकों की गलती नहीं है। गहरी जड़ें जमा चुकी जाति व्यवस्था के कारण हम शिक्षा में अपेक्षित परिवर्तन लाने में सक्षम नहीं हो पाए हैं।”
वैज्ञानिक और तर्कसंगत शिक्षा की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि संविधान ऐसे शिक्षा के माध्यम से व्यक्तियों के जिम्मेदार विकास की कल्पना करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘समाज अभी भी जाति, अंधविश्वास और दकियानूसी प्रथाओं से जकड़ा हुआ है। शिक्षा को इन प्रथाओं को समाप्त करने में सहायक होना चाहिए।’
उन्होंने कहा कि सभी वर्गों के मुख्यधारा में शामिल होने के लिए असमानता का अंत होना आवश्यक है। उन्होंने महात्मा गांधी के इस विचार को याद किया कि विकास तभी संभव है जब बुद्धि, करुणा और कौशल एक साथ मिलें। उन्होंने कहा, ‘केवल शिक्षक ही तर्कसंगत और वैज्ञानिक शिक्षा प्रदान कर सकते हैं। केवल शिक्षकों में ही साधारण लोगों को असाधारण व्यक्तियों में बदलने की शक्ति होती है।’
उन्होंने शिक्षकों से अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘विचारों को सवाल और तर्क के आधार पर ही स्वीकार करें। बच्चों को भी ऐसा करना सिखाएं।’’
उन्होंने आश्वासन दिया कि शिक्षकों की मांगों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब वे पहले वित्त मंत्री थे, तब एक लाख शिक्षकों की भर्ती की गई थी और छठे तथा सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की गई थीं।
उन्होंने कहा, “पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) पर मंत्रिमंडल में चर्चा की जाएगी और उसके बाद निर्णय लिया जाएगा।”
उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों को केवल इतिहास पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि इतिहास रचने के लिए तैयार करें।
भाषा अमित पवनेश
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