जयपुर, 17 जनवरी (भाषा) जयपुर लिटरेचर फेस्विटल (जेएलएफ) में आए लेखक अमीश त्रिपाठी ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी आध्यात्म से जुड़ रही है।
त्रिपाठी ने कहा कि आजकल लोग करुणा का प्रदर्शन करने में लगे हैं और इसकी सोशल मीडिया पर तस्वीर पोस्ट कर रहे हैं।
त्रिपाठी ने कहा कि उनके हिसाब से करुणा प्रदर्शन नहीं होना चाहिए बल्कि कर्म का प्रदर्शन होना चाहिए। वह जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शनिवार को पत्रकारों से बात कर रहे थे।
अमीश ने कहा, ‘‘हमारी युवा पीढ़ी का कहीं न कहीं पश्चिमीकरण हो रहा है। मोबाइल में पता नहीं क्या-क्या देखते रहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि सारे युवा ऐसे हैं। मेरी किताबें अधिकतर युवा ही पढ़ते हैं। हमारी युवा पीढ़ी हमारी संस्कृति से अपने ही अंदाज में जुड़ रही है। अब युवा आध्यात्म से भी जुड़ रहे हैं।’
शिव मंत्र 108 बार पढ़ने के महत्व का जिक्र करते हुए अमीष त्रिपाठी ने कहा, ‘‘हमारे पूर्वज आध्यात्म को विज्ञान से जोड़ते थे। हमारी संस्कृति में विज्ञान और वेद में भेद नहीं है। हमारे पूर्वज चाहते थे कि हमारी संस्कृति ऋतु से जुड़ी रहे। हमारी परंपरा रही है कि विज्ञान का सहारा लेकर प्रकृति के अनुकूल चला जाए।’’
उन्होंने कहा,‘‘हमारे देवी-देवताओं की कहानियां सुनने से हम उबते नहीं हैं। यही कारण है कि हमारी संस्कृति जिंदा है।’’
अमीश ने कहा, ‘‘यदि मुझे शिवलिंग की पूजा करनी है और मुझे ऐसा करना अच्छा लगता है, तौ मैं कर रहा हूं। लेकिन अंधविश्वास अच्छी बात नहीं हैं। मैं अभिव्यक्ति की आजादी में विश्वास रखता हूं। हमें यह हक नहीं है कि किसी की अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगा दें।’’
भाषा बाकोलिया
संतोष
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