असम में पिछले 10 वर्षों में एक लाख से ज्यादा पेड़ काटे गए : आधिकारिक आंकड़े

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असम में पिछले 10 वर्षों में एक लाख से ज्यादा पेड़ काटे गए : आधिकारिक आंकड़े

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  • Publish Date - March 8, 2026 / 03:10 PM IST,
    Updated On - March 8, 2026 / 03:10 PM IST

(त्रिदीप लहकर)

गुवाहाटी, आठ मार्च (भाषा) असम में मई 2016 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पहली बार सरकार बनने के बाद से अब तक राज्य भर में विभिन्न सार्वजनिक और निजी परियोजनाओं के लिए एक लाख से अधिक पेड़ काटे गए हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड से यह जानकारी मिली।

वहीं दूसरी ओर, असम सरकार ने कहा कि ये सभी पेड़ परियोजनाओं के विकास की ‘‘अत्यधिक आवश्यकता’’ के कारण काटे गए थे जबकि इसकी भरपाई के लिए पिछले केवल दो वर्षों के दौरान 3.5 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं।

हालांकि, विभिन्न सरकारी संस्थानों के विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी तादाद में पेड़ों को काटने से ‘‘अत्यधिक पारिस्थितिक नुकसान’’ हुआ है।

सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत पूछे गए सवालों के जवाब में असम के 44 वन्यजीव और क्षेत्रीय प्रभागों में से 15 ने बताया है कि मई 2016 से अब तक 1,06,896 पेड़ काटे गए हैं, 12 अन्य ने जवाब तो दिया लेकिन पेड़ काटने से संबंधित कोई जानकारी नहीं दी। शेष 16 प्रभागों से अब तक कोई जवाब नहीं आया है।

सवालों का जवाब देने वाले 27 प्रभागों में से किसी ने भी पेड़ों की कटाई के कारण पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर कोई अध्ययन नहीं किया है।

असम के वन मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि ये पेड़ तेल खोज परियोजनाओं के साथ-साथ बुनियादी ढांचे के विकास के लिए काटे गए थे।

उन्होंने कहा, ‘अमृत वृक्ष आंदोलन’ के तहत हमने एक ही दिन में एक करोड़ पौधे लगाए। हमने पिछले दो वर्षों में कुल 3.5 करोड़ पौधे लगाए हैं।’

आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, जवाब देने वाले अधिकांश अधिकारियों ने कहा कि उपयुक्त देखरेख के बाद 70 प्रतिशत से अधिक पौधे जीवित बचे हैं।

मई 2016 से अब तक अधिसूचित वन क्षेत्रों में 26,000 से अधिक पेड़ काटे गए हैं जबकि शेष पेड़ गैर-वन स्थानों पर काटे गए हैं।

विभिन्न सरकारी परियोजनाओं के लिए लगभग 84,000 पेड़ काटे गए। वहीं, निजी कार्यों के लिए 10,000 से अधिक पेड़ काटे गए हैं।

कॉटन यूनिवर्सिटी में पर्यावरण जीवविज्ञान और वन्यजीव विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर नारायण शर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पूरी तरह से विकसित हो चुके पेड़ों की कटाई की तुलना नये पौधे लगाने से करना उचित नहीं होगा।

वहीं, गुवाहाटी विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर (पर्यावरण विज्ञान) मीनाक्षी बोरा ने कहा, ‘ एक लाख से अधिक पेड़ों को काटना और पौधे लगाना पारिस्थितिक रूप से असमान कार्य हैं।’

उन्होंने कहा कि पूरी तरह से विकसित हो चुके पेड़ की भरपाई एक नया पौधा तुरंत नहीं कर सकता।

भाषा प्रचेता सुभाष

सुभाष