अभिभावक संघ ने ओएसएम मूल्यांकन प्रणाली, शिक्षकों के प्रशिक्षण के संबंध में जताई चिंता

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अभिभावक संघ ने ओएसएम मूल्यांकन प्रणाली, शिक्षकों के प्रशिक्षण के संबंध में जताई चिंता

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  • Publish Date - June 4, 2026 / 05:10 PM IST,
    Updated On - June 4, 2026 / 05:10 PM IST

नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) दिल्ली अभिभावक संघ (डीपीए) ने आरोप लगाया है कि कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए सीबीएसई ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को जल्दबाजी में लागू किया और शिक्षकों से पर्याप्त तैयारी, प्रशिक्षण या राय लिए बिना ही इसे कार्यान्वित कर दिया गया।

सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) का कहना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता, सटीकता और दक्षता बढ़ाने के लिए ओएसएम प्रणाली शुरू की गई।

बोर्ड का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से अंकों के जोड़ और अंक स्थानांतरण में होने वाली त्रुटियां समाप्त हो जाती हैं, मूल्यांकन प्रक्रिया में अधिक जवाबदेही सुनिश्चित होती है और परीक्षार्थियों के लिए अधिक मानकीकृत मूल्यांकन व्यवस्था उपलब्ध होती है।

डीपीए अध्यक्ष अपराजिता गौतम ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में दावा किया कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली का परीक्षण कम समय के लिए किया गया और इसमें केवल सीमित संख्या में शिक्षक शामिल थे।

गौतम ने कहा, ‘‘परीक्षण बहुत कम समय के लिए किया गया। शिक्षकों से समुचित राय नहीं ली गई। नमूना आकार भी बहुत छोटा था क्योंकि मुख्य ध्यान इस बात पर था कि क्या प्रणाली भार को संभाल सकती है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि कई शिक्षक स्कूलों में शैक्षणिक जिम्मेदारियों में व्यस्त होने के कारण प्रणाली से वाकिफ होने के लिए पर्याप्त समय नहीं दे पाए।

उन्होंने कहा, ‘‘पठन-पाठन कार्य और विद्यालय के प्रदर्शन को सुनिश्चित करना जिन शिक्षकों की मुख्य जिम्मेदारी है, वे अभ्यास के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल सके। उन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सही ढंग से किया या डिजिटल प्रणाली का पर्याप्त अभ्यास किया, इस पहलू पर भी समुचित ध्यान नहीं दिया गया।’’

उनकी यह टिप्पणी ऐसे वक्त आई है जब इस वर्ष ओएसएम प्रणाली लागू होने के बाद कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणामों में कथित विसंगतियों को लेकर छात्रों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

सीबीएसई के इस दावे पर, कि नयी प्रणाली से मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और इसे परीक्षकों ने सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है, गौतम ने कहा कि छात्रों से मिल रही शिकायतें कुछ और ही तस्वीर पेश करती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जब छात्र इतने सारे प्रमाण साझा कर रहे हैं, तब भी यदि अधिकारी यह कहें कि सब कुछ ठीक है, तो यह बेहद दुखद है। यह स्वीकार करने में क्या हर्ज है कि कहीं न कहीं गलती हुई हो सकती है? छात्र प्रमाण दिखाकर कह रहे हैं कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की सही ढंग से जांच नहीं हुई और उन्हें उनके उत्तर के अनुसार अंक नहीं दिए गए।’’

उन्होंने पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के संचालन पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि शुरुआती चरण में कई छात्रों को पोर्टल तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘‘कई ऐसे छात्र हैं जो प्रक्रिया के पहले चरण तक ही पहुंच नहीं पाए और उनके पास अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी भी नहीं है। ऐसे में उनकी समस्याओं का कैसे समाधान होगा?’’

गौतम ने सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए कथित तौर पर प्राप्त करीब 4.5 लाख आवेदनों के आंकड़े पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने दावा किया, ‘‘हमें यह जानने की जरूरत है कि ये आवेदन कहां से आ रहे हैं। इस संबंध में राज्यवार और शहर आधार पर आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए। बड़ी संख्या में छात्र सरकारी स्कूलों और ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं, जहां कंप्यूटर और तकनीकी सहायता तक पहुंच सीमित है। संभव है कि कई छात्र आवेदन ही नहीं कर पाए हों।’’

बोर्ड ने मंगलवार को बताया कि दोपहर 12 बजे तक ऑनलाइन पोर्टल पर उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए कुल 43,980 आवेदन प्राप्त हुए थे। बाद में, बोर्ड ने कहा कि रात 9:30 बजे तक यह संख्या 56,000 से अधिक हो गई थी।

सीबीएसई ने मंगलवार को उन छात्रों के लिए ऑनलाइन पोर्टल खोल दिया, जो अपनी परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं। इस पोर्टल के माध्यम से छात्र उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियों में पाई गई त्रुटियों के सत्यापन और उत्तरों के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। पोर्टल निर्धारित समय से देरी से शुरू हो पाया। इससे पहले सीबीएसई ने कहा था कि उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन प्रक्रिया 29 मई तक शुरू होने की उम्मीद है।

डीपीए प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि मूल्यांकनकर्ताओं की कमी के कारण कुछ उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) द्वारा की गई हो सकती है, जबकि सामान्यतः कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य स्नातकोत्तर शिक्षकों (पीजीटी) को सौंपा जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे इसकी जानकारी उन शिक्षकों से मिली जो प्रश्नपत्रों की जांच में शामिल थे। हमें यह जानकारी फिर से जांच की अवधि शुरू होने पर मिली।’’

मामले की जांच की मांग करते हुए गौतम ने कहा कि सीबीएसई को इस प्रक्रिया में शामिल मूल्यांकनकर्ताओं के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

भाषा आशीष मनीषा

मनीषा