नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों पर गंभीर आरोपों के मामलों में उनके लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहने की स्थिति में पद से हटाने का प्रावधान करने वाले 130वें संविधान संशोधन विधेयक पर विचार कर रही संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) ने शुक्रवार को अपनी मसौदा रिपोर्ट को अंगीकार करने की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया।
समिति की अध्यक्ष और भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने बताया कि सदस्यों का मत था कि इस विषय पर और अधिक चर्चा की आवश्यकता है, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।
इस संविधान संशोधन विधेयक पर गठित संयुक्त समिति ने अपनी मसौदा रिपोर्ट में पांच अनुशंसाएं की थीं। यह मसौदा रिपोर्ट हाल ही में समिति के सदस्यों के बीच प्रसारित की गई थी।
सारंगी ने कहा कि बीते शुक्रवार को जब समिति प्रत्येक अनुशंसा पर अलग-अलग मतदान कर रही थी, तब यह महसूस किया गया कि हितधारकों के साथ और व्यापक विचार-विमर्श तथा समिति के सदस्यों के बीच अतिरिक्त चर्चा की आवश्यकता है।
इसके बाद मसौदा रिपोर्ट को अपनाने की प्रक्रिया टालने का निर्णय लिया गया।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता असदुद्दीन ओवैसी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) की सांसद सुप्रिया सुले ने अपने असहमति नोट प्रस्तुत किए थे, लेकिन समिति द्वारा रिपोर्ट को अंगीकार करने का निर्णय स्थगित किए जाने के बाद उन्होंने उन्हें वापस ले लिया।
सारंगी ने कहा, ‘‘संयुक्त संसदीय समिति ने सर्वसम्मति से यह माना कि हितधारकों के साथ और अधिक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।’’
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