कानून मंत्रालय की मंजूरी के बिना एनएमसी विनियम जारी किए जाने पर संसदीय समिति ने जताई हैरानी

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कानून मंत्रालय की मंजूरी के बिना एनएमसी विनियम जारी किए जाने पर संसदीय समिति ने जताई हैरानी

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  • Publish Date - April 26, 2026 / 06:39 PM IST,
    Updated On - April 26, 2026 / 06:39 PM IST

नयी दिल्ली, 26 अप्रैल (भाषा) संसद की एक समिति ने कहा है कि उसे यह जानकर ‘हैरानी’ हुई कि केंद्रीय कानून मंत्रालय ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा जारी किए गए महत्वपूर्ण नियमों की समीक्षा नहीं की, जबकि यह भविष्य में किसी भी खामी को रोकने के लिए आवश्यक प्रक्रिया है।

लोकसभा की अधीनस्थ विधान समिति ने “राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम के तहत बनाए गए नियमों में खामियां” विषय पर अपनी रिपोर्ट में कहा कि कानून मंत्रालय के लिए मसौदा नियमों और विनियमों को कानूनी, संवैधानिक और रूपरेखा के दृष्टिकोण से जांचना आवश्यक होता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “समिति स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत आने वाले राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा प्रकाशित विनियमों पर गौर करने के दौरान यह देखकर चकित रह गई कि कानून मंत्रालय ने किसी अधीनस्थ विधान को बनाने में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली प्रक्रिया यानी संवैधानिक, कानूनी और रूपरेखा के दृष्टिकोण से उसकी समीक्षा को अनदेखा किया।”

हाल ही में संसद के बजट सत्र के दौरान यह रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी।

समिति की रिपोर्ट राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (चिकित्सा योग्यता की मान्यता) विनियम, 2023; चिकित्सा संस्थानों में शिक्षकों की पात्रता विनियम, 2022; और चिकित्सा संस्थान (संकाय की योग्यता) विनियम, 2025 की जांच पर आधारित है, जिनका मसौदा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने तैयार किया है।

संसदीय समिति ने कहा कि उसे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि कुछ मामलों में कानून मंत्रालय को जानकारी नहीं दी गई थी।

भाषा जोहेब सुरेश

सुरेश