जयपुर, 18 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के अध्यक्ष अभिजात शेठ ने शुक्रवार को कहा कि भले ही कृत्रिम मेधा (एआई) और डिजिटल नवान्मेष मेडिकल सेवाओं का हिस्सा बन रहे हैं लेकिन प्रौद्योगिकी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में मानवीय संवेदना और जवाबदेही की जगह नहीं ले सकती।
वह स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं के संगठन ‘एएचपीआई’ के यहां आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भविष्य की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली, प्रौद्योगिकी के मामले में तो अत्याधुनिक हो लेकिन उसमें मरीजों को ही केंद्र में रखा जाना चाहिए।
राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि राजस्थान ‘यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज’ की दिशा में काम कर रहा है और राज्य में लगभग 1.36 करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी अलग-अलग पहलों के दायरे में लाया जा रहा है।
भाषा पृथ्वी शोभना
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