रांची। झारखंड से भाजपा सांसद करिया मुंडा के घर पर मंगलवार को पत्थलगड़ी समर्थकों के हमला किए जाने के बाद खूंटी के घाघरा गांव से अगवा हुए उनके तीनों अंगरक्षकों का अब तक पता नहीं चला है। पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए पूरे गांव को खाली करवा लिया है। लेकिन उसके बाद भी यह जानकारी नहीं मिली है कि अगवा तीनों जवान पत्थलगड़ी समर्थकों के कब्जे में ही हैं या नहीं। अगवा जवानों में सुबोध कुजूर, विनोद केरकेट्टा और सियोन सुरीन शामिल हैं। हमलावरों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं।
मंगलवार को जब पत्थलगड़ी समर्थकों ने जब करिया मुंडा के घर पर हमला किया तब घर में सिर्फ उनकी बहू और परिजन थे, जबकि सांसद और उनके पुत्र दिल्ली में हैं। बताया जाता है कि घर पर तैनात अंगरक्षक बैजू उरांव ने घर का ग्रिल बंद कर दिया था। इससे पत्थलगड़ी समर्थक घर के अंदर नहीं पहुंच सके थे।
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पत्थलगड़ी समर्थकों के आतंक के चलते 6 किलोमीटर की दूरी के बाद भी मंगलवार शाम पांच बजे तक पुलिस सासंद के आवास पर नहीं पहुंची थी। सांसद व पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष करिया मुंडा की भाभी चीरेश्वरी देवी के मुताबिक हमले के समय तीनों जवान सादे पोशाक में घर के बाहर बैठे थे। हमलावर उन्हें घसीटते हुए ले गये। उन्होंने हथियार ले जाते हुए नहीं देखा। लेकिन कड़िया मुंडा के अंगरक्षक बैजू उरांव के अनुसार जवानों के कमरे में पांच इंसास राइफलें थीं, जिसमें सिर्फ एक ही बची हुई है।
बता दें कि झारखंड और छत्तीसगढ़ के कई आदिवासी इलाकों में इन दिनों पत्थलगड़ी की मुहिम छिड़ी हुई है। यहां ग्रामसभाओं में आदिवासी पत्थलगड़ी के माध्यम से स्वशासन की मांग कर रहे हैं। कई गांवों में आदिवासी, पत्थलगड़ी कर ‘अपना शासन, अपनी हुकूमत’ की मांग कर रहे हैं।
वेब डेस्क, IBC24