आरबीआई से उधार लेकर या ‘निजी ट्रस्ट कोष’ से धन जारी कर राज्यों का जीएसटी बकाया चुकाये: येचुरी

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आरबीआई से उधार लेकर या ‘निजी ट्रस्ट कोष’ से धन जारी कर राज्यों का जीएसटी बकाया चुकाये: येचुरी

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  • Publish Date - September 8, 2020 / 11:24 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:41 PM IST

नयी दिल्ली, आठ सितम्बर (भाषा) माकपा नेता सीताराम येचुरी ने सरकार पर राज्यों का माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का वैध बकाया देने से इनकार करने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को कहा कि उसे राज्यों को भुगतान करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से उधार लेना चाहिए या ‘‘एक निजी ट्रस्ट कोष’’ से राशि जारी करनी चाहिए। येचुरी का परोक्ष तौर पर इशारा पीएम-केयर्स फंड की ओर था।

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येचुरी ने ट्वीट किया, ‘‘मोदी सरकार को तत्काल आरबीआई से उधार लेना चाहिए और राज्यों को उनका वैध जीएसटी बकाये का भुगतान करना चाहिए। कम से कम मोदी को अब उस निजी ट्रस्ट कोष में जमा हजारों करोड़ रुपये राज्यों को कोविड-19 के खिलाफ उनकी लड़ाई को मजबूती प्रदान करने के लिए जारी करना चाहिए जिसमें उनका (प्रधानमंत्री का) नाम है।’’

माकपा महासचिव ने हालांकि ‘‘निजी ट्रस्ट कोष’’ का नाम नहीं लिया पर वह अक्सर सरकार पर पीएम-केयर्स फंड को लेकर हमला बोलते रहे है और उसे एक ‘‘निजी ट्रस्ट’’ बताते हैं।

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उन्होंने गत सात जुलाई को किए गए एक ट्वीट में कहा था, ‘‘प्रधानमंत्री के नाम वाले एक निजी ट्रस्ट द्वारा सरकार के प्राधिकार का उपयोग करते हुए हजारों करोड़ रुपये एकत्रित किए गए हैं। यह गैर-पारदर्शी है, इसकी लेखा परीक्षा नहीं हो सकती, इसलिए यह गैर-जवाबदेह है। शर्मनाक: महामारी का मुकाबला करने के नाम पर पैसा बनाया जाता है, जब लोग इस स्वास्थ्य आपातकाल से पीड़ित हैं। एक और घोटाला।’’

उच्चतम न्यायालय ने हाल में पीएम केयर्स फंड से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) को धन हस्तांतरण का आदेश देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि वे दो ‘‘पूरी तरह से अलग कोष हैं जिसका उद्देश्य अलग-अलग है।’’

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मंगलवार को येचुरी ने सरकार पर इस खबरों को लेकर निशाना साधा कि केंद्र कोरोना वायरस को लेकर सीधे जिला अधिकारियों से अद्यतन जानकारी प्राप्त कर रहा है और इस तरह से निर्वाचित सरकारों को ‘‘दरकिनार’’ कर रहा है।

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा,‘‘पीएम टू डीएम माइनस सीएम (प्रधानमंत्री का मुख्यमंत्री को बिना बीच में लाये सीधे जिलाधिकारियों से सम्पर्क)। राज्य अग्रिम मोर्चे पर रहकर महामारी से सीधे मुकाबला कर रहे हैं। उनकी मदद करने के बजाय, केंद्र ने उन्हें उनके वैध जीएसटी बकाये का भुगतान करने से इनकार कर दिया। अब वह निर्वाचित सरकारों को दरकिनार कर रहा है, अधिकारियों को सीधे जानकारी मुहैया कराने को कहता है। निगरानी?’’