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सिंगूर (पश्चिम बंगाल), 18 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को तृणमूल कांग्रेस सरकार पर ‘वोट बैंक’ की राजनीति के लिए घुसपैठियों की मदद करके राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विकास और सुशासन का मार्ग प्रशस्त करने के लिए पश्चिम बंगाल में पार्टी के ‘‘महाजंगल राज’’ को समाप्त करना जरूरी है।
हुगली जिले के सिंगूर में एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार सीमा पर बाड़ लगाने सहित महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों पर केंद्र के साथ सहयोग करने में ‘‘विफल’’ रही है।
प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘तृणमूल कांग्रेस राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रही है। वे घुसपैठियों को संरक्षण देने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि वे उन्हें अपना वोट बैंक मानते हैं।’’
उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य में फर्जी दस्तावेजों के जरिये रह रहे अवैध प्रवासियों की पहचान करके उन्हें उनके देशों में वापस भेजना होगा।
मोदी ने आरोप लगाया, ‘‘पिछले कई वर्षों से केंद्र सरकार सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन की मांग करते हुए तृणमूल सरकार को पत्र लिख रही है, लेकिन राज्य सरकार ने कुछ नहीं किया।’’
प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस बंगाल में घुसपैठियों को बसाने में मदद करने वाले समूहों का समर्थन करती है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार राज्य से अवैध प्रवासियों को बाहर करेगी।
उन्होंने रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘भाजपा को आपका वोट बंगाल से घुसपैठियों को बाहर निकालने में मदद करेगा।’’
मोदी ने राज्य में ‘‘डबल इंजन’’ वाली सरकार बनाने का आह्वान किया।
सत्ता परिवर्तन की अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के ‘‘महाजंगल राज’’ को समाप्त करना और सुशासन के लिए प्रतिबद्ध भाजपा सरकार लाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा, ‘‘बंगाल में भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार होनी चाहिए, क्योंकि इससे विकास को गति मिलेगी।’’
पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि राज्य में ‘‘टीएमसी का ‘सिंडिकेट राज’ बेखौफ चल रहा है’’।
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा सरकार इसे खत्म करेगी। उद्योग और निवेश बंगाल में तभी आएंगे जब कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधरेगी।’’
मोदी ने कहा कि लोगों को भाजपा को वोट देना चाहिए, ताकि संदेशखलि में भूमि हड़पने और बलात्कार की घटनाएं दोबारा न हों और भ्रष्टाचार के कारण शिक्षकों को अपनी नौकरी न गंवानी पड़े।
भाषा शफीक सुरेश
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