सरकारी शिक्षा तंत्र पर से जनता का बरसों पुराना भरोसा टूटा : अशोक गहलोत

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सरकारी शिक्षा तंत्र पर से जनता का बरसों पुराना भरोसा टूटा : अशोक गहलोत

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  • Publish Date - July 9, 2026 / 03:30 PM IST,
    Updated On - July 9, 2026 / 03:30 PM IST

जयपुर, नौ जुलाई (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्कूल में बच्चों के बीच में ही पढ़ाई छोड़ देने पर चिंता जताते हुए दावा किया कि राजस्थान में बीते दो साल में ही 8.4 लाख से अधिक बच्चों ने अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ दी है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने ‘ड्रॉपआउट’ को लेकर राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया और कहा कि सरकारी शिक्षा तंत्र पर से जनता का बरसों पुराना विश्वास टूट रहा है।

एक बयान में उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘राजस्थान की भाजपा सरकार के कार्यकाल में मात्र दो वर्षों में ही 8.4 लाख से अधिक ‘बच्चों का ड्रॉपआउट’ बेहद चिंताजनक है। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब निजी स्कूलों में नामांकन सरकारी स्कूलों से अधिक हो गया है। यह राज्य के सरकारी विद्यालयों की गिरती साख का सीधा प्रमाण है।’’

गहलोत ने कहा ‘‘विडंबना यह है कि इसी अवधि में शिक्षकों की संख्या 7.8 लाख से बढ़कर 7.9 लाख से अधिक हो गई, फिर भी कुप्रबंधन के कारण सरकारी स्कूलों ने 9.3 लाख से अधिक छात्र खो दिए।’’

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि आज राजस्थान में सिर्फ स्कूलों की छतें ही नहीं गिर रहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा तंत्र पर जनता का जो बरसों पुराना विश्वास था, वह भी गिर रहा है।

कांग्रेस नेता के अनुसार शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य करवाना, स्कूलों का बुनियादी ढांचा दरकना, मरम्मत ठप होना और शिक्षा में सुधार के बजाय पाठ्यक्रम का लगातार राजनीतिकरण करना ही इस पतन का कारण है। शिक्षामंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ जब शिक्षा मंत्री का ध्यान शिक्षा छोड़कर बाकी सब जगह रहेगा, तो यही स्थिति होनी थी।’’

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जिस बेहतरीन सरकारी शिक्षा मॉडल को खड़ा किया था उसे वर्तमान सरकार की अदूरदर्शिता ने पूरी तरह तबाह कर दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया है कि राजस्थान के नौनिहालों के इस धूमिल होते भविष्य का जिम्मेदार कौन है?

भाषा पृथ्वी

नरेश मनीषा

मनीषा