नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधार की मांग करने वाले, डॉक्टरों के एक संगठन समेत याचिकाकर्ताओं से बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार के हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा।
केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि नीट-स्नातक (यूजी) परीक्षा को कलम-कागज आधारित प्रणाली के स्थान पर, संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई-मुख्य और उन्नत) की तर्ज पर कंप्यूटर आधारित प्रणाली में कराने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने कहा कि वह मामले पर 19 अगस्त को सुनवाई करेगी। पीठ ने याचिकाकर्ताओं को केंद्र के जवाबी हलफनामे पर अपना उत्तर दाखिल करने की अनुमति दी।
‘फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ (एफएआईएमए) की ओर से पेश अधिवक्ता तन्वी दुबे ने पीठ से कहा कि यदि परीक्षा को कंप्यूटर आधारित प्रणाली में कराने की कोई योजना है तो इसे जल्द लागू किया जाना चाहिए, क्योंकि फिलहाल विद्यार्थी कलम-कागज आधारित परीक्षा पद्धति के अनुरूप तैयारी कर रहे हैं।
पीठ ने कहा कि वह सभी पहलुओं पर विचार करेगी। उसने पक्षकारों से अपने जवाब तथा सुझाव दाखिल करने को कहा।
एनटीए में सुधार की मांग करने वाले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष कांति रॉय और अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत पेश हुए।
केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि नीट-यूजी परीक्षा को कलम-कागज आधारित प्रणाली से कंप्यूटर आधारित प्रणाली में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर, चाहे वह एक चरण में हो या जेईई (मुख्य एवं उन्नत) की तर्ज पर दो चरणों में, संबंधित पक्ष सक्रिय रूप से विचार कर रहे हैं।
केंद्र ने कहा कि अंतिम निर्णय नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले उच्चस्तरीय कार्यबल की सिफारिशों पर विचार करने के बाद लिया जाएगा।
केंद्र ने यह भी कहा कि प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा प्रणाली की खामियों को समाप्त करने के लिए नीट परीक्षा आयोजित करने की व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए गए हैं।
यह हलफनामा उच्चतम न्यायालय के 29 मई के उस आदेश के जवाब में दाखिल किया गया, जिसमें केंद्र सरकार से यह बताने को कहा गया था कि भविष्य में नीट परीक्षा किस प्रकार आयोजित की जाएगी और नियामक संस्थाएं परीक्षा प्रक्रिया में लगातार सुधार के लिए संस्थागत अनुभव को किस प्रकार सुरक्षित रखेंगी।
केंद्र ने कहा कि संसद ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) अधिनियम, 2026 के माध्यम से परीक्षा में धोखाधड़ी के खिलाफ कानूनी ढांचे को और मजबूत किया है। यह संशोधन 2024 के उस कानून पर आधारित है, जिसमें प्रश्नपत्र लीक, फर्जी अभ्यर्थी बैठाना, कंप्यूटर प्रणाली से छेड़छाड़ और परीक्षा से जुड़े अन्य अपराधों को दंडनीय बनाया गया था।
याचिकाओं में से एक में नीट-यूजी आयोजित करने वाली एनटीए के स्थान पर एक मजबूत और स्वायत्त संस्था गठित करने अथवा एजेंसी का पुनर्गठन करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
गौरतलब है कि तीन मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा को प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद एनटीए ने 12 मई को रद्द कर दिया था। दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की गई थी। प्रश्नपत्र लीक के आरोपों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा है।
वर्ष 2024 में नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक के आरोप सामने आने पर उच्चतम न्यायालय ने परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था, लेकिन प्रश्नपत्र लीक की रोकथाम तथा सार्वजनिक परीक्षाएं रद्द किए जाने के मानदंड तय करने संबंधी कई निर्देश जारी किए थे।
भाषा मनीषा नरेश
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