PM Modi Ka Bhashan Live
नई दिल्ली: PM Modi Ka Bhashan Live संसद के बजट सत्र का आज सातवां दिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब दिए। पीएम मोदी की स्पीच के बीच विपक्ष के सदस्य वेल में आकर जोरदार हंगामा किया। जोरदार नारेबाजी के बीच उन्होंने कहा, धन्यवाद प्रस्ताव पर समर्थन के लिए इस सदन में अपनी भावनाओं को व्यक्त करना मैं अपना सौभाग्य मानता हूं। देश आज तेज प्रगति कर रहा है। हालांकि इस दौरान विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया है।
प्रधानमंत्री ने कहा, छत्तीसगढ़ के बस्तर में तो कुछ गांवों ने पहली बार बस देखी। यह हाल छोड़कर गए हैं। इंप्लीमेंटेशन क्या होता है, यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट इसका उदाहरण है। कांग्रेस के हमारे साथियों को यह जो बदलाव आ रहा है, उसमें इंप्लीमेंटेशन नहीं आ रहा है। इनका जीप और खच्चर वाला मॉडल ही ये लोग जानते हैं। ये लोग उसे कैसे इंप्लीमेंट करते हैं। जब मेरा जन्म नहीं हुआ था, तब सरदार पटेल ने नर्मदा नदी पर बांध बांधने की कल्पना की। नेहरू जी ने इसकी नींव रख दी थी। लेकिन इनका इंप्लीमेंटेशन देखिए कि मैंने प्रधानमंत्री बनने के बाद इसका उद्घाटन किया। मुझे मुख्यमंत्री रहते हुए तीन दिन का अनशन करना पड़ा तब सरकार झुकी और सरदार सरोवर का काम आगे बढ़ा और मैंने यहां (पीएम) आकर उसका उद्घाटन किया।
इससे पहले पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस ने विश्वासघात करने के विषय में भी हमारे देश के अन्नदाता को भी नहीं छोड़ा। इस देश में 10 करोड़ किसान ऐसे हैं, जिनके पास दो हेक्टेयर से कम जमीन है। छोटे किसान हैं, उनकी तरफ कभी नहीं देखा गया। न ही उनके दिमाग में छोटे किसान का कोई महत्व था। उन्हें लगता था कि कुछ बड़े लोगों को संभाल लिया तो राजनीति चलती रहेगी। हमारे मन में छोटे किसानों के लिए दर्द था। हम जमीनी हकीकत से परिचित थे। इसलिए हम किसान सम्मान निधि लेकर आए। हमने अब तक 4 लाख करोड़ रुपये छोटे किसानों को दिया है। इससे उन्हें नए सपने देखने का सामर्थ्य मिला है।
उन्होंने कहा, यहां कुछ साथियों ने इंप्लिमेंटेशन की शिकायतों को लेकर काफी भाषण दिए हैं। ये जो इतनी बड़ी बातें करते हैं। मैं एक किस्सा सुनाता हूं- “हमारे देश के एक नेता हिमाचल प्रदेश के दौरे पर थे। और वहां से आने के बाद उन्होंने खुद ने ये घटना कहीं सुनाई। रिकॉर्ड पर उपलब्ध है। उन्होंने कहा- काफी लंबे समय तक मुझे योजना आयोग से संघर्ष करना पड़ा है। क्योंकि वे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग योजनाएं बनाने के लिए तैयार ही नहीं थे। मैं हिमाचल प्रदेश गई थी, जब मैं वापस आई तो मैंने योजना आयोग में कहा कि हमारे कामदारों को जीप की जरूरत नहीं है, बल्कि खच्चरों की आवश्यकता है, ताकि उन पर सामान आदि लादा जा सके। लेकिन मुझे बताया गया कि हम पैसा तो जीप के लिए ही देंगे, क्योंकि खच्चरों के लिए पैसा देने की पॉलिसी नहीं है। उन नेता का कहना था कि जहां वो हिमाचल में गई थीं, वहां सड़क नहीं थी। तो वहां जीप का क्या काम लेकिनन उस वक्त योजना आयोग का जोर था कि या तो जीप या कुछ नहीं। यह भाषण और किसी का नहीं कांग्रेस की तत्कालीन नेता इंदिरा गांधी का भाषण है।”
उन्होंने कहा, कांग्रेस की यही कार्यशैली रही थी। खुद इंदिरा गांधी जी यह जानती थीं लेकिन इस कार्यशैली को बदलने के लिए उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया। वे जिस प्लानिंग कमीशन की धज्जियां उड़ा रही थीं, उसके जन्मदाता उनके खुद के पिताजी थे। 2014 तक सब दुखी थे, सब परेशान थे। लेकिन कोई तैयार नहीं था सुधार को। इसके बाद जब हमें 2014 में मौका मिला तो हमने प्लानिंग कमीशन को खत्म किया और नीति आयोग की स्थापना हुई। नीति आयोग आज काफी तेज काम कर रहा है।