प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौता कर किसानों के ‘डेथ वारंट’ पर हस्ताक्षर किया : राहुल

Ads

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौता कर किसानों के ‘डेथ वारंट’ पर हस्ताक्षर किया : राहुल

  •  
  • Publish Date - February 28, 2026 / 08:35 PM IST,
    Updated On - February 28, 2026 / 08:35 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

बरनाला(पंजाब), 28 फरवरी (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने कृषि उत्पादों सहित अमेरिकी सामानों के लिए दरवाजे खोलकर किसानों और लघु एवं मध्यम उद्योगों के ‘‘डेथ वारंट’’ (मौत के फरमान) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

पंजाब के बरनाला में आयोजित ‘किसान महाचौपाल’ रैली को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा, ‘‘मैं जिम्मेदारी से कह रहा हूं कि एक तूफान आ रहा है। जब अमेरिका के बादाम, सेब, दालें, कपास और सोयाबीन भारत आएंगे, तब तूफान आएगा।’’

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि प्रधानमंत्री ऐसा नहीं करना चाहते थे। गांधी ने आरोप लगाया, ‘‘लेकिन उन्होंने एप्स्टीन फाइल जारी करने की धमकी और उद्योगपति गौतम अदाणी की कंपनी के खिलाफ अमेरिका में चल रहे एक मामले के कारण दबाव में आकर यह कदम उठाया।’’

गांधी राज्य के राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मालवा क्षेत्र में रैली को संबोधित कर रहे थे। पंजाब विधानसभा की कुल 117 सीट में से 69 सीट इसी मालवा क्षेत्र में आती हैं।

उन्होंने कथित तौर पर गुटबाजी की शिकार पंजाब की कांग्रेस इकाई के नेताओं को कड़ा संदेश देते हुए चेतावनी दी कि यदि वे टीम के खिलाड़ी नहीं बन सकते हैं तो उन्हें रिजर्व में बैठा दिया जाएगा।

पंजाब विधानसभा का चुनाव अगले साल प्रस्तावित है।

गांधी ने कहा, ‘‘मैं कांग्रेस पार्टी को यह संदेश देना चाहता हूं कि काम टीम भावना से ही होता है। एक खिलाड़ी मैच नहीं जीत सकता। हमारी पूरी टीम यहां मौजूद है।’’

गांधी ने कहा, ‘‘खरगे जी (कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे)और मेरी ओर से, मैं यह संदेश देना चाहता हूं कि टीम के खिलाड़ी बनो, अन्यथा हम आपको रिजर्व खिलाड़ी के रूप में बिठा देंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आप चाहे कितने भी बड़े नेता क्यों न हों, पार्टी से बड़ा कोई नहीं होता। टीम के सदस्य बनें और अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो मैं और खरगे जी आपको सही कर देंगे।’’

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर मोदी सरकार पर अपना हमला तेज करते हुए प्रधानमंत्री पर देश को ‘बेचने’ और ‘बर्बाद’ करने का आरोप लगाया।

उन्होंने सवाल किया, ‘‘जब भारत ने हर साल नौ लाख करोड़ रुपये के अमेरिकी उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई तो उसे इस व्यापार समझौते के बदले में क्या मिला।’’

गांधी ने कहा कि अगर भारत हर साल नौ लाख करोड़ रुपये का सामान खरीदता है, ‘‘तो हमारे लघु एवं मध्यम उद्योग क्षेत्र का क्या होगा? यह तो खत्म हो जाएंगे’’।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने रैली में कहा, ‘‘आपने देश बेच दिया, आपने देश को बर्बाद कर दिया। अमेरिका ने भारत को क्या दिया? मुझे एक बात बताएं… क्या उन्होंने कोई गारंटी दी? क्या उन्होंने कहा कि वे खरीदेंगे भी? नहीं।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि क्षेत्र को खोलने को लेकर असहमति के कारण यह सौदा चार महीने से रुका हुआ था।

गांधी ने कहा, ‘‘मैंने विशेषज्ञों से पूछा कि यह (कृषि) समझौता क्यों अटका हुआ है। मुझे जवाब मिला कि अमेरिका चाहता है कि भारतीय कृषि क्षेत्र को उसके लिए खोला जाए और हमारी सरकार इसे खोलना नहीं चाहती।’’

उन्होंने कहा कि इस मोर्चे पर चार महीने तक कुछ भी नहीं हुआ।

गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने मंत्रिमंडल, कृषि मंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री से परामर्श किए बिना अमेरिकी राष्ट्रपति को फोन किया।

नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, मोदी ने ट्रंप से कहा कि वह इस समझौते के लिए तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि मोदी ने ट्रंप को गारंटी दी कि ‘‘भारत हर साल नौ लाख करोड़ रुपये के अमेरिकी उत्पाद खरीदेगा’’।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि यह समझौता ‘‘भारतीय किसानों को बर्बाद कर देगा’’।

उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत भारत ने अमेरिका को सोयाबीन, मक्का, कपास, फल और बादाम बेचने की अनुमति दी है।

गांधी ने कहा, ‘‘हमारे किसान आधुनिक मशीनों से लैस नहीं हैं। उनके पास छोटी जोत वाली भूमि हैं, जबकि इसके उलट अमेरिका में विशाल जोत हैं और वहां मशीनीकृत खेती भी होती है।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘नरेन्द्र मोदी जी ने कृषि क्षेत्र के दरवाजे खोल दिए हैं। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, ओडिशा- इन सभी राज्यों के किसान बर्बाद हो जाएंगे।’’

गांधी ने कहा, ‘‘अमेरिका से सामान आएगा और हमारे किसान बर्बाद हो जाएंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मोदी ऐसा नहीं करना चाहते थे। मुझे पता है, क्योंकि चार महीने से वह इसे रोकने की कोशिश कर रहे थे। सरकार में हमारे संपर्क हैं, हम नौकरशाहों को जानते हैं, और हमने उनसे पूछा कि क्या वह कृषि क्षेत्र खोलेंगे। उन्होंने कहा कि वह ऐसा नहीं कर रहे हैं।’’

गांधी ने कहा, ‘‘कांग्रेस हो या भाजपा, आज तक किसी प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र को नहीं खोला है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘फिर सवाल उठता है कि जो काम मोदी ने चार महीने तक नहीं किया, वह उन्होंने 15 मिनट में कैसे कर दिया?’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘सवाल उठता है कि ऐसा क्या दबाव था कि भारत के प्रधानमंत्री ने देश, किसानों और लघु एवं मध्यम उद्योगों के ‘डेथ वांरट’ पर हस्ताक्षर कर दिए और हमारे डाटा दे दिए?’’

गांधी ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने 35 लाख ‘एप्स्टीन फाइल जारी कीं, जिनमें उद्योगपति अनिल अंबानी और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नाम शामिल हैं।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘मोदी को धमकाने के लिए इन नामों का इस्तेमाल किया गया है। पैंतीस लाख से अधिक फाइल हैं, और उन फाइल में मोदी का सच छिपा है। अमेरिका और ट्रंप, मोदी को धमकी दे रहे हैं कि अगर वह हस्ताक्षर नहीं करते हैं, तो ये फाइल खोल दी जाएंगी।’’

गांधी ने अदाणी समूह को भी निशाना बनाया। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘पिछले 10-15 वर्षों में भाजपा ने अपनी पूरी वित्तीय व्यवस्था अदाणी कंपनी के हाथों में सौंप दी है। अदाणी कोई सामान्य कंपनी नहीं है। यह भाजपा की एक विशेष प्रयोजन कंपनी है। इससे जो भी कमाई होती है, वह अदाणी के पास जाता है और फिर इस पैसे का इस्तेमाल राजनीति में किया जाता है।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘और इसीलिए मोदी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।’’

गांधी ने एक बार फिर दावा किया कि हाल ही में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद उन्हें लोकसभा में बोलने की अनुमति नहीं दी गई, क्योंकि वह पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे के संस्मरणों पर टिप्पणी करना चाहते थे।

उन्होंने कहा कि उनका इरादा जनरल नरवणे (सेवानिवृत्त) की एक अप्रकाशित पुस्तक का उल्लेख करने का था, जिसमें, उनके (नरवणे के) दावे के अनुसार, सीमा के निकट चीनी सैनिकों की गतिविधियों के दौरान राजनीतिक नेतृत्व की त्वरित प्रतिक्रिया के अभाव का वर्णन किया गया है।

गांधी ने केंद्र पर देश की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका से कहा है कि भारत उसके द्वारा निर्दिष्ट देश से तेल खरीदेगा।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘‘हम न तो रूस से तेल खरीदेंगे और न ही ईरान से। अगर आप (अमेरिका) हमें वेनेजुएला, अमेरिका और सऊदी अरब से तेल खरीदने के लिए कहते हैं, तो भारत की पूरी ऊर्जा सुरक्षा खत्म हो जाएगी।’’

उन्होंने यूक्रेन और गाजा में चल रहे संघर्षों का जिक्र करते हुए संकेत दिया कि असली लड़ाई चीन और अमेरिका के बीच है।

गांधी ने कहा कि अगर अमेरिका को चीन से लड़ना है, तो उसे भारतीय डेटा की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय डेटा के बिना अमेरिका चीन से नहीं लड़ सकता। चीन के पास दुनिया का डेटा है। भारत इसमें दूसरे स्थान पर है। हमारे पास करोड़ों लोग हैं। डेटा के बिना कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का कोई मतलब नहीं है।’’

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 21वीं सदी में किसी राष्ट्र की नींव डेटा पर टिकी होती है और यही उस देश की संपत्ति है। उन्होंने दावा किया, ‘‘अमेरिका-भारत समझौते के तहत छोटे अक्षरों में लिखा गया है कि भारत का पूरा डेटा प्रधानमंत्री द्वारा अमेरिका को सौंपा जा रहा है।’’

इस अवसर पर कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल, भूपेश बघेल, पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर रंधावा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।

भाषा धीरज सुरेश

सुरेश