(तस्वीरों के साथ)
सिंगूर (पश्चिम बंगाल), 18 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को पश्चिम बंगाल में 830 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की शुरुआत की और कोलकाता को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली तीन अमृत भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
हुगली जिले के सिंगूर में आयोजित समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने जयरामबती-बारोगोपीनाथपुर-मयनापुर रेल लाइन का भी उद्घाटन किया तथा मयनापुर और जयरामबती के बीच चलने वाली एक ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।
इस मौके पर मोदी ने कहा, ‘‘सभी केंद्रीय परियोजनाएं पश्चिम बंगाल के विकास में तेजी लाएंगी। केंद्र सरकार विकसित पूर्वी भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए काम कर रही है।’’
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, मोदी ने हुगली जिले के बालागढ़ में अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडब्ल्यूटी) टर्मिनल समेत विस्तारित ‘पोर्ट गेट सिस्टम’ और एक रोड ओवरब्रिज की आधारशिला रखी।
लगभग 900 एकड़ भूमि में फैला बालागढ़ एक आधुनिक माल ढुलाई टर्मिनल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसकी अनुमानित क्षमता लगभग 27 लाख टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) है।
बालागढ़ परियोजना का उद्देश्य भीड़भाड़ वाले शहरी गलियारों से जहाजों की आवाजाही का मार्ग परिवर्तित कर माल निकासी क्षमता में उल्लेखनीय सुधार करना है।
बंगाल में जलमार्ग क्षेत्र में अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार इस दिशा में काम कर रही है।
मोदी ने कहा कि शनिवार से पश्चिम बंगाल से जुड़ी हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत राज्य के विकास की दिशा में एक अहम कदम है।
प्रधानमंत्री ने शनिवार को मालदा से 3,250 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया था।
पश्चिम बंगाल और भारत की प्रगति के लिए जलमार्गों का विकास आवश्यक बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यह वह आधारशिला है जिस पर राज्य के विनिर्माण, व्यापार और परिवहन क्षेत्रों के लिए एक बड़ा केंद्र बनाया जा सकता है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि बंदरगाहों और संबंधित पारिस्थितिकी तंत्रों पर पर्याप्त ध्यान देने से आय के अधिक अवसर सृजित होंगे।
उन्होंने कहा कि केंद्र ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह की क्षमता विस्तार के लिए भारी निवेश किया है।
मोदी ने दावा किया कि इन बुनियादी ढांचा विकास के परिणाम सामने हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साल, कोलकाता बंदरगाह ने माल ढुलाई में एक नया रिकॉर्ड बनाया।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोलकाता से 80 किलोमीटर दूर बालागढ़ में विस्तारित ‘पोर्ट गेट सिस्टम’ से नए अवसर पैदा होंगे और शहर पर यातायात का दबाव कम होगा।
मोदी ने कहा कि हुगली नदी के माध्यम से माल ढुलाई में वृद्धि होगा तथा बुनियादी ढांचे के विकास से हुगली जिले को भंडारण और व्यापार का केंद्र बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘इससे सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश होगा और हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। छोटे व्यापारियों और ट्रांसपोर्टर को फायदा होगा, जबकि किसानों और निर्माताओं को नए बाजारों का लाभ मिलेगा।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में ‘मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और ग्रीन मोबिलिटी’ पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘सुगम यात्रा सुनिश्चित करने, लागत और समय बचाने के लिए बंदरगाहों, जलमार्गों, राजमार्गों और हवाई अड्डों को आपस में जोड़ा जा रहा है। हमारा प्रयास परिवहन के साधनों को प्रकृति के अनुकूल बनाना भी है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि हाइब्रिड इलेक्ट्रिक नौकाओं से नदी परिवहन और हरित परिवहन दोनों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे हुगली नदी में यात्रा आसान होगी, प्रदूषण कम होगा और नदी आधारित पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
उन्होंने कहा कि भारत मत्स्य पालन, समुद्री खाद्य पदार्थ उत्पादन और इनके निर्यात में तेजी से प्रगति कर रहा है। मोदी ने कहा, ‘‘मेरा सपना है कि पश्चिम बंगाल इस क्षेत्र में देश का नेतृत्व करे।’’
मोदी ने कहा कि अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के लिए केंद्र सरकार बंगाल को प्राथमिकता के आधार पर समर्थन दे रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे किसानों के साथ-साथ हमारे मछुआरों को भी इसका लाभ मिलेगा।’’
मोदी ने कोलकाता को नयी दिल्ली, वाराणसी और चेन्नई से जोड़ने वाली तीन अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
ये ट्रेन हावड़ा-आनंद विहार टर्मिनल, सियालदह-बनारस और संतरागाछी-तांबरम मार्गों पर चलेंगी।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को कल पश्चिम बंगाल से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था।’’
प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को चार और रविवार को तीन अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को ऑनलाइन माध्यम से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
मोदी ने कहा, ‘‘इनमें से एक परियोजना मेरे लोकसभा क्षेत्र वाराणसी की बंगाल से कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगी। पिछले 24 घंटे पश्चिम बंगाल के रेलवे क्षेत्र के लिए अभूतपूर्व रहे हैं, संभवतः पिछले 100 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है।’’
भाषा शफीक राजकुमार
राजकुमार