राष्ट्रपति मुर्मू ने आयुर्वेद विद्यार्थियों से आचार्य सुश्रुत के मार्ग का अनुसरण करने का आग्रह किया

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राष्ट्रपति मुर्मू ने आयुर्वेद विद्यार्थियों से आचार्य सुश्रुत के मार्ग का अनुसरण करने का आग्रह किया

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  • Publish Date - July 15, 2026 / 04:44 PM IST,
    Updated On - July 15, 2026 / 04:44 PM IST

(फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आयुर्वेद के युवा विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं से आचार्य सुश्रुत द्वारा दिखाये गये मार्ग का अनुसरण करने और चिकित्सा में नैतिकता तथा रोगियों के प्रति करुणामय सेवा के अपने संकल्प पर अडिग रहने का बुधवार को आग्रह किया।

मुर्म ने साथ ही पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली की वैश्विक स्वीकृति को मजबूत करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और नयी तकनीकों को अपनाने की भी अपील की।

सुश्रुत जयंती के मौके पर यहां अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘सौश्रुतम् 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा कि आयुर्वेद का भविष्य युवा पीढ़ी के हाथों में है।

उन्होंने विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को ईमानदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ व्यावहारिक शोध करने तथा उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करने की सलाह दी।

मुर्मू ने कहा, ‘‘जहां भी उचित हो, उन्हें नयी तकनीकों का इस्तेमाल करने से हिचकिचाना नहीं चाहिए।’’ उन्होंने उनसे आचार्य सुश्रुत द्वारा दिखाए गए मार्ग का अनुसरण करने और चिकित्सा में नैतिकता तथा रोगियों के प्रति करुणामय सेवा के लिए प्रतिबद्ध रहने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने कार्यक्रम के दौरान एआईआईए की एमआरआई इकाई का भी उद्घाटन किया।

मुर्मू ने आयुर्वेद जगत को आचार्य सुश्रुत की जयंती पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सदियों पहले आचार्य सुश्रुत ने जब शल्य चिकित्सा पद्धति का सूत्रपात किया था, तब वह अपने समय की एक क्रांति से कम नहीं था।

राष्ट्रपति ने कहा कि आचार्य सुश्रुत अनेक जटिल एवं नवाचारपूर्ण शल्य क्रियाओं के प्रवर्तक के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने कहा कि आचार्य सुश्रुत अपने समय में प्‍लास्‍टिक सर्जरी, मोतियाबिंद सर्जरी, ट्यूमर के उपचार और ईएनटी सर्जरी जैसे अनेक क्षेत्रों में नयी पद्धतियों को सामने लाये।

उन्होंने कहा कि उनके द्वारा रची गयी सुश्रुत संहिता ने केवल भारतीय उपमहाद्वीप को ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को भी एक नयी दिशा प्रदान की है।

मुर्मू ने कहा कि भारत की परंपराओं में निहित ज्ञान को समाज के फायदे के लिए बदलते समय के साथ सामंजस्य बनाते हुए आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

आयुर्वेद की जीवन के प्रति समग्र दृष्टि को मानवता के लिए एक वरदान बताते हुए, उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाने चाहिए कि यह प्राचीन चिकित्सा प्रणाली वर्तमान युग में भी प्रासंगिक और प्रभावी बनी रहे।

मुर्मू ने कहा कि भारत सरकार ने आयुर्वेद और योग को विश्व पटल पर नयी ऊर्जा के साथ प्रतिष्ठित किया है।

उन्होंने कहा कि मानकीकृत दस्तावेजीकरण, डिजिटल स्वास्थ्य एकीकरण और आधुनिक वैज्ञानिक शोध तकनीकें आयुर्वेद की वैश्विक स्वीकृति को बढ़ाने में मदद करेंगी।

राष्ट्रपति ने विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि ‘सौश्रुतम् 2026’ में होने वाले विचार-विमर्श से नए ज्ञान का सृजन होगा और इससे आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अधिक सुदृढ़ होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे सार्थक आयोजनों से समग्र स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में आयुर्वेद के योगदान को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

एआईआईए की ओर से आयोजित त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्‍ठी में भारत और अन्य देशों के जाने-माने सर्जन, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग लेंगे।

भाषा देवेंद्र मनीषा

मनीषा