एआई समिट में विरोध-प्रदर्शन: अदालत ने युवा कांग्रेस के अध्यक्ष को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा

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एआई समिट में विरोध-प्रदर्शन: अदालत ने युवा कांग्रेस के अध्यक्ष को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा

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  • Publish Date - February 24, 2026 / 04:45 PM IST,
    Updated On - February 24, 2026 / 04:45 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने ‘भारत मंडपम’ में आयोजित ‘इंडिया एआई इंपैक्ट समिट’ में विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामले में मंगलवार को गिरफ्तार किए गए भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के अध्यक्ष उदय भानु चिब को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।

जांच अधिकारी ने एआई समिट में हुए विरोध-प्रदर्शन में चिब की भूमिका के बारे में पूछताछ करने के लिए उनकी सात दिन की हिरासत का अनुरोध किया था। हालांकि, न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि ने चिब की चार दिन की पुलिस हिरासत की अनुमति दी।

अदालत ने कहा, “जांच अधिकारी की अर्जी आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है। आरोपी को आज से 28 फरवरी तक चार दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेजा जाता है। उक्त अवधि समाप्त होने पर जांच अधिकारी आरोपी को संबंधित न्यायालय या संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष विस्तृत हिरासत रिपोर्ट के साथ पेश करेंगे।”

अदालत ने कहा कि हिरासत अवधि के दौरान जांच अधिकारी को सभी संवैधानिक और वैधानिक सुरक्षा उपायों का पालन करना होगा, जिनमें चिकित्सा परीक्षण, केस डायरी का रखरखाव और आरोपी को निर्धारित समय के भीतर अदालत के समक्ष पेश किया जाना शामिल है।

अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा-38 के तहत चिब के पूछताछ के दौरान अपने वकील से मिलने के अधिकार को “स्पष्ट रूप से” रेखांकित किया। हालांकि, उसने स्पष्ट किया कि ऐसी मुलाकात जांच की वैध आवश्यकताओं में बाधा नहीं डाल सकती।

बीएनएसएस की धारा-38 कहती है कि जब पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ करती है, तो उसे पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के वकील से मिलने का अधिकार होगा, लेकिन पूरी पूछताछ के दौरान नहीं।

न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा कि जांच अधिकारी की ओर से उचित रूप से निर्धारित अंतराल पर वकील की उपस्थिति की अनुमति दी जाएगी, लेकिन पूरी पूछताछ के दौरान नहीं और इस तरह से नहीं कि पूछताछ में सीधे तौर पर बाधा उत्पन्न हो।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा, उपस्थिति और अनुमति वैधानिक नियमों तथा न्यायिक निर्णयों के अनुरूप होनी चाहिए।

अदालत ने कहा, “इस आदेश में कही गई कोई भी बात मामले के गुण-दोष पर अभिव्यक्ति या किसी विशिष्ट दंड प्रावधान (जिसमें बीएनएस की धारा 197(1)(डी) (राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोप, दावे) शामिल है) को लागू किए जाने के अंतिम निर्धारण के रूप में नहीं मानी जाएगी, जिस पर उचित चरण में मामले में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर विचार किया जाएगा।”

युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने बीते शुक्रवार को शिखर सम्मेलन स्थल के हॉल नंबर 5 के अंदर कमीज उतारकर और सरकार तथा भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के खिलाफ लिखे नारे वाली टी-शर्ट हाथ में लेकर विरोध-प्रदर्शन किया था, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें वहां से हटा दिया था।

गिरफ्तारी मेमो में आरोप लगाया गया है कि चिब शिखर सम्मेलन के दौरान “गैरकानूनी तरीके से एकत्र होने से जुड़ी घटना के मुख्य साजिशकर्ता” थे, जहां सह-आरोपियों ने “राष्ट्र-विरोधी नारे लगाए गए” और “दंगा जैसी स्थिति पैदा करने” की भी कोशिश की।

इसमें कहा गया है, “आपने (चिब) श्री कृष्ण हरि, कुंदन यादव, नरसिम्हा यादव, अजय कुमार यादव आदि के साथ मिलकर पुलिस अधिकारियों के काम में बाधा डाली और उन पर हमला किया। इसके अलावा, आपने पूछताछ के दौरान सहयोग नहीं किया और न ही उन सह-आरोपियों के नाम बताए, जो मौके से फरार हो गए थे।”

गिरफ्तारी मेमो में कहा गया है, “आपने (चिब) उन टी-शर्ट की छपाई के स्रोत का भी खुलासा नहीं किया, जिनका इस्तेमाल अन्य सह-आरोपी साजिशकर्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान किया था। मामले की जांच जारी है और उचित तफ्तीश के लिए आपको गिरफ्तार किया जा रहा है।”

मामले में शुक्रवार को पुलिस ने बिहार से युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कृष्णा हरि, प्रदेश सचिव कुंदन यादव, उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय कुमार और तेलंगाना से नरसिम्हा यादव को गिरफ्तार किया था।

भाषा पारुल मनीषा

मनीषा