पंजाब स्थानीय निकाय चुनाव : मतपत्रों के इस्तेमाल को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

पंजाब स्थानीय निकाय चुनाव : मतपत्रों के इस्तेमाल को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

पंजाब स्थानीय निकाय चुनाव : मतपत्रों के इस्तेमाल को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
Modified Date: May 25, 2026 / 02:40 pm IST
Published Date: May 25, 2026 2:40 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी जिसके तहत नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव मतपत्रों के जरिये कराने का निर्णय लिया गया है।

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता रुचिता गर्ग से न्यायालय का दरवाजा देर से खटखटाने को लेकर सवाल किया और कहा कि अब चुनाव प्रक्रिया में व्यवधान नहीं डाला जा सकता।

पीठ ने कहा, ‘‘चुनाव कल हैं, अब क्या किया जा सकता है? अब समय नहीं बचा है।’’

उसने कहा, ‘‘आपको चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक अधिसूचना जारी होने का इंतजार करने की जरूरत नहीं थी। आपको पता था कि चुनाव होने हैं। इससे पहले कई दौर की मुकदमेबाजी हो चुकी है।’’

पीठ ने चुनावों में पर्यवेक्षक नियुक्त करने से भी इनकार कर दिया और कहा कि यह बहुत गंभीर हस्तक्षेप होगा और न्यायालय ऐसा नहीं करेगा।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि चुनाव मतपत्रों से कराए जाने हैं। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) मामले के फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को सामान्य प्रक्रिया माना जाना चाहिए।

शीर्ष अदालत पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उच्च न्यायालय ने आगामी पंजाब स्थानीय निकाय चुनाव में ईवीएम की जगह मतपत्रों का इस्तेमाल करने के राज्य निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली गर्ग की याचिका खारिज कर दी थी।

पंजाब में आठ नगर निगमों सहित 104 नगर निकायों के लिए मतदान 26 मई को होगा। मतगणना 29 मई को होगी।

राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले उच्च न्यायालय को बताया था कि स्थानीय निकाय चुनाव मतपत्रों से इसलिए कराए जा रहे हैं क्योंकि निर्वाचन आयोग निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ईवीएम उपलब्ध कराने में विफल रहा।

राज्य सरकार के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि यह सुनवाई योग्य नहीं है।

भाषा

सिम्मी मनीषा

मनीषा


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