पुरी के जगन्नाथ मंदिर के बैंक खातों में 1,912 करोड़ रुपये, मंदिर के नाम 60,821 एकड़ जमीन

पुरी के जगन्नाथ मंदिर के बैंक खातों में 1,912 करोड़ रुपये, मंदिर के नाम 60,821 एकड़ जमीन

पुरी के जगन्नाथ मंदिर के बैंक खातों में 1,912 करोड़ रुपये, मंदिर के नाम 60,821 एकड़ जमीन
Modified Date: September 3, 2026 / 03:14 pm IST
Published Date: September 3, 2026 3:14 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

पुरी, तीन सितंबर (भाषा) ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर के बैंक खातों में लगभग 1,912 करोड़ रुपये की बैंक जमा राशि है और मंदिर के नाम पर देश भर में 60,821 एकड़ जमीन है। इसके अलावा मंदिर के ‘रत्न भंडार’ में सोने और हीरे के गहने भी रखे हैं। मंदिर प्रशासन के एक बयान से यह जानकारी मिली।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) की ओर से जारी बयान के मुताबिक 31 अगस्त तक तीन योजनाओं के तहत सावधि जमा में 1,811.10 करोड़ रुपये जमा थे।

बयान में कहा गया है कि इसमें से 1,311.10 करोड़ रुपये अलग-अलग सरकारी बैंकों में जमा हैं जबकि शेष 500 करोड़ रुपये ओडिशा सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई अक्षय निधि है जिसे मंदिर के लाभ-हानि खाते में रखा गया है।

मंदिर के पास 31 अगस्त तक अलग-अलग बचत खाते, चालू खाते और फ्लेक्सी खातों (बचत खाते और सावधि जमा के मिश्रण वाले खाते) में 100.71 करोड़ रुपये भी थे जिससे इसकी कुल बैंक जमा राशि लगभग 1,911.80 करोड़ रुपये हो गई।

एसजेटीए ने बताया कि उसकी आय मुख्य रूप से भक्तों के दान, मंदिर की खदानों से होने वाली कमाई, सावधि जमा पर मिलने वाले ब्याज, जमीन की खरीद-बिक्री और सरकारी अनुदान से होती है।

एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने बुधवार को एक बयान में कहा, ‘‘आय का कुछ हिस्सा अक्षय निधि के तौर पर सावधि जमा में रखा जाता है और दूसरा हिस्सा स्थापना कोष के तौर पर सावधि जमा में रखा जाता है। बाकी बची आय को मंदिर के कोष में रखा जाता है।’’

उन्होंने कहा कि मंदिर के रोजमर्रा के खर्च मंदिर के कोष से पूरे किए जाते हैं जबकि बाकी रकम सावधि जमा में रखी जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन की मुख्य जिम्मेदारी अपनी सभी संपत्ति का सही ढंग से रखरखाव करना है।

मंदिर के नाम पर देश भर में 60,821 एकड़ जमीन है। इसमें से 60,426 एकड़ जमीन ओडिशा के 24 जिलों में जबकि 395 एकड़ जमीन पश्चिम बंगाल समेत छह अन्य राज्यों में है।

मंदिर का सोना, हीरा और अन्य कीमती वस्तुएं कड़ी सुरक्षा के बीच ‘रत्न भंडार’ में रखी गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि 48 साल के अंतराल के बाद अभी इनकी सूची बनाई जा रही है।

भाषा सुरभि नरेश

नरेश


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