संजीव भट्ट ने हिरासत में मौत मामले में अपनी सजा निलंबित करने संबंधी याचिका वापस ले ली

संजीव भट्ट ने हिरासत में मौत मामले में अपनी सजा निलंबित करने संबंधी याचिका वापस ले ली

संजीव भट्ट ने हिरासत में मौत मामले में अपनी सजा निलंबित करने संबंधी याचिका वापस ले ली
Modified Date: November 29, 2022 / 07:52 pm IST
Published Date: August 3, 2022 5:04 pm IST

नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) गुजरात कैडर के बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट ने हिरासत में मौत के तीन-दशक पुराने एक मामले में अपनी उम्रकैद की सजा निलंबित करने संबंधी याचिका उच्चतम न्यायालय से बुधवार को वापस ले ली।

संजीव भट्ट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति एम. आर. शाह और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की पीठ को बताया कि गुजरात उच्च न्यायालय दोषसिद्धि के खिलाफ भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी भट्ट की अपील की सुनवाई दैनिक आधार पर कर रहा है।

सिब्बल ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी और कहा कि उच्च न्यायालय को कानून के अनुसार मामले से निपटने के लिए कहा जाना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने तब कहा कि उच्च न्यायालय में अपील पर कानून के अनुसार गुणदोष के आधार पर फैसला किया जाएगा। इसके साथ ही याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी गयी।

उच्च न्यायालय ने पहले भट्ट की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि उनके (भट्ट के) पास अदालतों के प्रति बहुत कम सम्मान है और पूर्व आईपीएस अधिकारी ने जानबूझकर कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की कोशिश की थी। भट्ट को इस मामले में जून 2019 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

यह मामला प्रभुदास वैश्नानी की हिरासत में मौत से संबंधित है। भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा के मद्देनजर बंद के आह्वान के बाद सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। जिसके बाद जामनगर पुलिस ने वैश्नानी समेत 133 लोगों को पकड़ा था।

इसके बाद, उसके भाई ने भट्ट और छह अन्य पुलिसकर्मियों पर पुलिस हिरासत में रहने के दौरान वैश्नानी को प्रताड़ित करके उसकी हत्या करने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

भाषा सुरेश प्रशांत

प्रशांत


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