अदालत ने सनातनी बने मुस्लिम व्यक्ति के खिलाफ बार-बार जांच का आदेश देने पर एसडीएम को लगाई फटकार

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अदालत ने सनातनी बने मुस्लिम व्यक्ति के खिलाफ बार-बार जांच का आदेश देने पर एसडीएम को लगाई फटकार

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  • Publish Date - May 12, 2026 / 10:17 PM IST,
    Updated On - May 12, 2026 / 10:17 PM IST

प्रयागराज, 12 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वेच्छा से सनातन धर्म अपना चुके एक मुस्लिम व्यक्ति के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत बार-बार पुलिस जांच कराने के आदेश देने के लिए प्रयागराज की अपर जिला मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को कड़ी फटकार लगाई है।

बार-बार जांच का आदेश केवल इसलिए दिया गया क्योंकि याचिकाकर्ता के खिलाफ उसके ससुर ने एक आपराधिक मामला दर्ज कराया था। ससुर याचिकाकर्ता के साथ अपनी बेटी के विवाह का विरोध कर रहा था। बाद में एसडीएम ने याचिकाकर्ता के धर्म परिवर्तन संबंधी आवेदन को खारिज कर दिया था।

न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की पीठ ने अपर जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन), प्रयागराज के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें याचिकाकर्ता के धर्म परिवर्तन की घोषणा की पुष्टि करने से इनकार किया गया था।

अदालत ने पांच मई के अपने आदेश में संबंधित अपर जिला मजिस्ट्रेट को व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए, याचिकाकर्ता के पक्ष में आई शुरुआती दो जांच रिपोर्ट तथा याचिकाकर्ता व उसकी पत्नी के साथ अदालत की बातचीत को ध्यान में रखकर नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया।

मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता अनिल पंडित (पूर्व में मोहम्मद एहसान) इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक संस्थान में सहायक प्रोफेसर हैं। उन्होंने धर्म परिवर्तन की इच्छा जाहिर करते हुए 12 जनवरी, 2022 को संबंधित कानून की धारा-8 के तहत घोषणा प्रस्तुत की थी।

इसके बाद 11 फरवरी, 2022 को एक पुजारी ने आगामी धर्म परिवर्तन अनुष्ठान के संबंध में जिला मजिस्ट्रेट को सूचना दी। अंततः 14 मार्च, 2022 को एक आर्य समाज मंदिर में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया संपन्न हुई।

वर्ष 2022 और 2023 के दौरान पुलिस ने दो जांच रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट को सौंपीं, जिनमें कहा गया कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से और बिना किसी दबाव या प्रलोभन के किया गया।

हालांकि, इन स्पष्ट निष्कर्षों के बावजूद अपर जिला मजिस्ट्रेट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले का हवाला देते हुए पुलिस से एक और रिपोर्ट मांगी।

इसके बाद नौ अगस्त, 2024 को अपर जिला मजिस्ट्रेट ने जुलाई 2024 की पुलिस रिपोर्ट के आधार पर धर्म परिवर्तन प्रमाणपत्र के लिए याचिकाकर्ता का आवेदन खारिज कर दिया। बाद की रिपोर्ट में कहा गया था कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि वर्ष 2021 के अधिनियम की धारा 8(3) के तहत जिला मजिस्ट्रेट या अपर जिला मजिस्ट्रेट केवल एक जांच करा सकते हैं और वे लगातार कई जांच के आदेश नहीं दे सकते।

उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती जांच रिपोर्ट स्पष्ट रूप से याचिकाकर्ता के पक्ष में थीं और उनसे यह साबित होता है कि उसने स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाया।

मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता और उसकी पत्नी से व्यक्तिगत बातचीत में यह स्पष्ट हुआ कि दोनों ने स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाया है। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि विद्यालय के दिनों से ही उसका सनातन धर्म की ओर गहरा झुकाव रहा है।

पीठ ने कहा कि अपर जिला मजिस्ट्रेट ने धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया के अनुपालन की जांच करने के बजाय विवाह की वैधता और आपराधिक प्राथमिकी पर अधिक ध्यान देकर स्वयं को भ्रमित कर लिया।

दंपति को राहत देते हुए अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी पत्नी के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए स्वतंत्र है और पुलिस उनके निजी जीवन में हस्तक्षेप नहीं करेगी।

अदालत ने अपर जिला मजिस्ट्रेट को तीन सप्ताह के भीतर नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 27 मई, 2026 को होगी।

भाषा सं राजेंद्र खारी

खारी