न्यायालय ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के 732 हेक्टेयर क्षेत्र को गैर-अधिसूचित करने के कदम पर रोक लगाई

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न्यायालय ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के 732 हेक्टेयर क्षेत्र को गैर-अधिसूचित करने के कदम पर रोक लगाई

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  • Publish Date - April 2, 2026 / 07:07 PM IST,
    Updated On - April 2, 2026 / 07:07 PM IST

नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अवैध रेत खनन को ‘‘सुविधाजनक बनाने’’ के लिए राजस्थान सरकार को फटकार लगाते हुए राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के 732 हेक्टेयर क्षेत्र को गैर-अधिसूचित करने वाली उसकी अधिसूचना पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी।

न्यायालय ने कहा कि वह संरक्षित प्रजातियों के लिए आरक्षित किसी भी भूमि को गैर-अधिसूचित करने की अनुमति नहीं देगा।

उच्चतम न्यायालय ने खनन माफिया को ‘‘डकैत’’ करार देते हुए कहा कि राजस्थान में खनन माफिया द्वारा उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) और पुलिसकर्मियों सहित कई सरकारी अधिकारियों की हत्या कर दी गई है।

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, जिसे राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य भी कहा जाता है, 5,400 वर्ग किलोमीटर का त्रि-राज्य संरक्षित क्षेत्र है।

राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों के पास चंबल नदी पर स्थित इस अभयारण्य को पहली बार 1978 में मध्य प्रदेश में एक संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था और अब यह तीनों राज्यों द्वारा संयुक्त रूप से प्रशासित एक लंबा और संकरा पारिस्थितिक आरक्षित क्षेत्र है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि घड़ियाल और कई अन्य जलीय जीव लगभग विलुप्त होने की कगार पर हैं।

शीर्ष अदालत ने 732 हेक्टेयर क्षेत्र को गैर-अधिसूचित करने को ‘‘गंभीर मुद्दा’’ बताते हुए राजस्थान की ओर से पेश हुए वकील से कहा कि राज्य की अधिसूचना आवश्यक वैधानिक आवश्यकताओं पर खरी नहीं उतरी है।

न्यायालय स्वत: संज्ञान मामले पर सुनवाई कर रहा था। न्यायमूर्ति मेहता ने राजस्थान की ओर से पेश वकील से कहा, ‘‘राज्य सरकार अपने स्तर पर यह कदम नहीं उठा सकती। यह गैरकानूनी है।’’

पीठ ने स्पष्ट किया कि वह संरक्षित प्रजातियों के लिए आरक्षित किसी भी भूमि को गैर-अधिसूचित करने की अनुमति नहीं देगी।

राजस्थान में अवैध रेत खनन का जिक्र करते हुए पीठ ने कहा, ‘‘आप अवैध खनन को सुविधाजनक बना रहे हैं।’’

इस मामले में ‘न्याय मित्र’ के रूप में अदालत की सहायता कर रहे एक वकील ने इसी मुद्दे पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष 2022 से लंबित एक अलग कार्यवाही का हवाला दिया।

‘न्याय मित्र’ ने कहा कि राजस्थान ने अभी तक किसी भी पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) परिभाषित नहीं किया है।

उन्होंने बताया कि राजस्थान ने पिछले वर्ष दिसंबर में 732 हेक्टेयर क्षेत्र को गैर-अधिसूचित करने की अधिसूचना जारी की थी।

पीठ ने पूछा, ‘‘इससे संरक्षण कार्यक्रम पर सीधा प्रभाव कैसे पड़ता है?’’

न्याय मित्र ने बताया कि एक बार इसे गैर-अधिसूचित किए जाने पर यह राजस्व भूमि बन जाती है। उन्होंने पीठ से राजस्थान द्वारा जारी अधिसूचना पर रोक लगाने का अनुरोध किया।

पीठ ने कहा, ‘‘राजस्थान द्वारा दिनांक 23 दिसंबर, 2025 को जारी और नौ मार्च, 2026 को अधिसूचित अधिसूचना पर रोक रहेगी।’’

राजस्थान की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत से अधिसूचना पर रोक लगाने के बजाय यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश देने का आग्रह किया।

पीठ ने कहा, ‘‘अगली तारीख पर हम आपके सभी अनुरोधों पर विचार करेंगे।’’

इसके बाद मामले की सुनवाई 11 मई के लिए निर्धारित की गई।

पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि एनजीटी के समक्ष लंबित मामले को उच्चतम न्यायालय में स्थानांतरित किया जाए।

भाषा शफीक अमित

अमित