मुंबई क्लस्टर पुनर्विकास परियोजना मामले में कार्यादेश जारी करने पर न्यायालय ने रोक लगाई

मुंबई क्लस्टर पुनर्विकास परियोजना मामले में कार्यादेश जारी करने पर न्यायालय ने रोक लगाई

मुंबई क्लस्टर पुनर्विकास परियोजना मामले में कार्यादेश जारी करने पर न्यायालय ने रोक लगाई
Modified Date: July 30, 2026 / 09:07 pm IST
Published Date: July 30, 2026 9:07 pm IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया है कि मुंबई में महाराष्ट्र सरकार की 132 एकड़ भूमि पर क्लस्टर पुनर्विकास परियोजना के लिए 13 अगस्त तक कोई कार्यादेश जारी नहीं किया जाए।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ मुंबई की एमआईजी आदर्श नगर को-ऑपरेटिव सोसायटी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका बंबई उच्च न्यायालय के दो जुलाई के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें महाराष्ट्र आवासीय एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएचएडीए) द्वारा किए जा रहे “बड़े पुनर्विकास कार्य” को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं।

पीठ ने बुधवार को दिए अपने आदेश में कहा, “तेरह अगस्त, 2026 को सूचीबद्ध करें… तब तक कार्यादेश जारी न किया जाए।”

पीठ ने महाराष्ट्र सरकार समेत सभी प्रतिवादियों को एक सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता सोसायटी को जवाब दाखिल करने के लिए एक और सप्ताह का समय दिया गया है।

एमएचएडीए की इस परियोजना में वर्ली में लगभग 34.33 एकड़ के आदर्श नगर क्षेत्र का “बड़ा पुनर्विकास कार्य” और बांद्रा रिक्लेमेशन क्षेत्र में लगभग 98.27 एकड़ जमीन का एकीकृत पुनर्विकास शामिल है।

याचिकाकर्ताओं के पास 99 साल का पट्टा है। उन्होंने बंबई उच्च न्यायालय में दलील दी कि एमएचएडीए द्वारा उनके अलग-अलग भूखंड को एक तृतीय पक्ष की निर्माण और विकास एजेंसी के जरिये एक बड़े क्लस्टर में जबरन शामिल करने का फैसला उनके संपत्ति अधिकारों का उल्लंघन है।

भाषा जोहेब सुरेश

सुरेश


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