शेखावत कांग्रेस मामलों पर टिप्पणी करने के बजाय अपने मंत्री पद की जिम्मेदारियों पर ध्यान दें: गहलोत
शेखावत कांग्रेस मामलों पर टिप्पणी करने के बजाय अपने मंत्री पद की जिम्मेदारियों पर ध्यान दें: गहलोत
जयपुर, सात जून (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें कांग्रेस मामलों पर टिप्पणी करने के बजाय अपने मंत्री पद की जिम्मेदारियों पर ध्यान देना चाहिए।
गहलोत ने कहा कि शेखावत कांग्रेस मामलों को लेकर अधिक चिंतित दिखाई देते हैं, बजाय अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता करने के।
गहलोत ने यहां पत्रकारों से कहा, “शेखावत चिंतित व्यक्ति हैं। उन्हें पता नहीं कि वह कितने समय तक मंत्री बने रहेंगे। उन्हें हम पर टिप्पणी करने के बजाय अपने मंत्री पद को बचाने पर ध्यान देना चाहिए।”
शेखावत ने जोधपुर में एक बयान में कहा था कि जब भी सचिन पायलट को कांग्रेस में नई भूमिका मिलने वाली होती है, गहलोत उन्हें निशाना बनाते हैं।
गहलोत, शेखावत के बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।
गहलोत ने आरोप लगाया कि शेखावत उन मुद्दों को लेकर असहज रहते हैं, जो मानेसर प्रकरण से जुड़े हैं।
गहलोत सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे पायलट ने 2020 में गहलोत के नेतृत्व के खिलाफ बगावत की थी।
पायलट और कुछ विधायक हरियाणा के मानेसर में जाकर ठहरे थे।
गहलोत ने आरोप लगाया, “इसी वजह से वे ऐसी टिप्पणियां करते रहते हैं। वह (शेखावत) मानेसर प्रकरण के सहभागी भी थे।”
उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार गिराने की साजिश से जुड़ी बैठकें केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास पर होती थीं।
गहलोत ने ‘संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी’ मामले का भी उल्लेख किया और दावा किया कि शेखावत राजस्थान उच्च न्यायालय से पूर्ण राहत पाने में विफल रहे हैं।
कांग्रेस नेता लंबे समय से शेखावत पर इस घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाते रहे हैं, जिसमें लाखों निवेशकों के साथ धोखाधड़ी हुई थी।
गहलोत ने महंगाई को लेकर भी भाजपा पर हमला बोला और कहा कि बढ़ती कीमतें आम परिवारों, खासकर महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा, “महंगाई महिलाओं को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाती है। कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि लोग कल्पना भी नहीं कर सकते। सरकार को लोगों की कठिनाइयों की कोई समझ नहीं है।”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने राहुल गांधी की हालिया ग्रेट निकोबार यात्रा का भी उल्लेख किया और कहा कि पर्यावरणीय चिंताओं को व्यावसायिक हितों के लिए बलिदान नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “ग्रेट निकोबार एक राष्ट्रीय धरोहर है। सरकार और उद्योगपतियों को सोचना चाहिए कि वे देश को कहां ले जा रहे हैं।”
भाषा बाकोलिया जितेंद्र
जितेंद्र

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