सिद्धरमैया को कार्यकाल पूरा करने का भरोसा, देवराज उर्स के रिकॉर्ड की बराबरी की

सिद्धरमैया को कार्यकाल पूरा करने का भरोसा, देवराज उर्स के रिकॉर्ड की बराबरी की

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  • Publish Date - January 6, 2026 / 03:45 PM IST,
    Updated On - January 6, 2026 / 03:45 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

मैसूरु, छह जनवरी (भाषा) सबसे लंबे समय तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहने के देवराज उर्स के रिकॉर्ड की मंगलवार को बराबरी करने वाले सिद्धरमैया ने अपने पांच साल के कार्यकाल को पूरा करने का भरोसा व्यक्त करते हुए कहा कि इस पर कांग्रेस आलाकमान को फैसला करना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि जब आलाकमान उन्हें बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल फेरबदल के संबंध में चर्चा के लिए बुलाएगा तो वे उनसे इस बारे में बात करेंगे।

मुख्यमंत्री के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल में, सिद्धरमैया ने मंगलवार, छह जनवरी को देवराज उर्स के सबसे लंबे समय (2,792 दिन) तक सेवा करने वाले कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली और सात जनवरी को वह इसे पार कर लेंगे।

यह अनूठा रिकॉर्ड ऐसे समय में सामने आया है जब सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर सत्ता संघर्ष तेज हो गया है और राज्य में मुख्यमंत्री बदले जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं, क्योंकि कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा कर लिया है। सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच 2023 में हुए “सत्ता-साझाकरण” समझौते ने इस अटकलबाजी को और हवा दी।

सिद्धरमैया ने यहां संवाददाताओं को बताया, “मैंने कोई रिकॉर्ड तोड़ने के लिए राजनीति नहीं की है; यह महज एक संयोग है। मुझे नहीं पता था कि देवराज उर्स ने कितने साल और कितने दिन मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की। आज जनता के आशीर्वाद से मुझे देवराज उर्स के रिकॉर्ड की बराबरी करने का मौका मिला है। कल यह रिकॉर्ड टूट जाएगा।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या वे पांच साल का कार्यकाल पूरा करके एक और रिकॉर्ड बनाएंगे, तो उन्होंने कहा, यह कांग्रेस आलाकमान को तय करना है। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि आलाकमान कब फैसला करेगा।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें अपना कार्यकाल पूरा करने का भरोसा है और क्या आलाकमान उनके पक्ष में फैसला करेगा, तो उन्होंने कहा, “मुझे भरोसा है। अगर मुझे भरोसा नहीं होता, तो मैं मुख्यमंत्री कैसे बन पाता?… यह सब आलाकमान के फैसले पर निर्भर करता है।”

मैसूरु में सोमवार को एआईसीसी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के साथ अपनी मुलाकात के बारे में सिद्धरमैया ने बताया कि कांग्रेस नेता वायनाड से मैसूरु होते हुए बेंगलुरु जा रहे थे और फिर दिल्ली के लिए रवाना होने वाले थे। उन्होंने कहा, “क्योंकि वे मैसूरु में थे और मैं भी यहीं था, इसलिए हमारी मुलाकात हुई।”

मंत्रिमंडल में फेरबदल पर किसी भी तरह की चर्चा से इनकार करते हुए इस सवाल के जवाब में कि इसकी कब उम्मीद की जा सकती है, उन्होंने कहा, “देखते हैं, उन्हें (आला कमान को) मुझे (चर्चा के लिए) बुलाने दीजिए, मैं चर्चा करूंगा।”

राज्य में सामाजिक न्याय और भूमि सुधारों के प्रतीक माने जाने वाले उर्स दो बार मुख्यमंत्री रहे – पहली बार 20 मार्च, 1972 से 31 दिसंबर, 1977 तक 2,113 दिनों के लिए और दूसरी बार 28 फरवरी, 1978 से 7 जनवरी, 1980 तक 679 दिनों के लिए।

सिद्धरमैया, जो उर्स के बाद पांच साल पूरे करने वाले एकमात्र मुख्यमंत्री भी हैं, अपने पहले कार्यकाल में 13 मई, 2013 से 15 मई, 2018 तक 1,829 दिनों तक पद पर रहे। अपने दूसरे कार्यकाल में, 20 मई 2023 से अब तक, उन्होंने 963 दिन पूरे कर लिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी किसी रिकॉर्ड के बारे में नहीं सोचा था और उन्होंने केवल यही सोचा था कि वे एक बार विधायक बन जाएं।

उन्होंने कहा, “मैं विधायक बना, मुझे अवसर मिले, मैं मंत्री बना, उपमुख्यमंत्री बना, विपक्ष का नेता बना और मुख्यमंत्री भी बना। मुझे अवसर मिले और मैंने अपने कर्तव्यों का निर्वाह किया।”

उन्होंने कहा, “देवराज उर्स और मैं दोनों मैसूरु से हैं, लेकिन हमारे कार्यकाल अलग-अलग रहे हैं। वे (उर्स) 1972 से 1980 तक मुख्यमंत्री रहे। मैं 2013 से 2018 और 2023 से अब तक दो बार मुख्यमंत्री रह चुका हूं। आगे, आलाकमान जो भी निर्णय लेगा, वही होगा।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी लंबी राजनीतिक यात्रा से वह“संतुष्ट” हैं और जनता की सेवा करना उन्हें खुशी देता है। उन्होंने कहा, “राजनीति का अर्थ है गरीबों, दलितों, पिछड़ों के लिए न्याय करना और उनके हितों की रक्षा करना।”

सिद्धरमैया ने जोर देकर कहा कि जनता के आशीर्वाद से ही उनकी राजनीतिक प्रगति हुई है, लेकिन समाज में अब भी असमानता मौजूद है, और जब तक यह असमानता दूर नहीं हो जाती और सभी को सामाजिक न्याय नहीं मिल जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा और वे जनता की सेवा करते रहेंगे।

सिद्धरमैया के प्रशंसकों ने अपने नेता की इस उपलब्धि का जश्न कई स्थानों पर दावतों का आयोजन करके मनाया, जिसमें उनके पसंदीदा “नाटी कोली” (देसी मुर्गा) से बने व्यंजन परोसे गए।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए और इस सवाल के जवाब में कि वह ‘नाटी कोली’ व्यंजनों के एक तरह के ब्रांड एंबेसडर बन गए हैं, सिद्धरमैया ने कहा कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है और न ही उन्हें यह पता है कि दावतों का आयोजन कौन कर रहा है।

उन्होंने कहा, “मैं एक गांव से हूं और हमारे गांव में आमतौर पर रिश्तेदारों के आने पर नाटी कोली बनाई जाती थी, इसलिए मैं पहले नाटी कोली और रागी मुड्डे खाता था, अब थोड़ा कम खाता हूं। गांव के कई लोगों को यह मेरी तरह पसंद है, लेकिन चूंकि मैं मुख्यमंत्री हूं, इसलिए इसे थोड़ा प्रचार मिल रहा है।”

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश