केंद्रीय छात्रवृत्ति में 700 करोड़ रुपये की कमी को लेकर सोरेन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा

केंद्रीय छात्रवृत्ति में 700 करोड़ रुपये की कमी को लेकर सोरेन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा

केंद्रीय छात्रवृत्ति में 700 करोड़ रुपये की कमी को लेकर सोरेन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा
Modified Date: July 30, 2026 / 07:29 pm IST
Published Date: July 30, 2026 7:29 pm IST

रांची, 30 जुलाई (भाषा) झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि पिछले दो वित्तीय वर्षों में केंद्रीय छात्रवृत्ति सहायता में 700 करोड़ रुपये से ज्यादा की भारी कमी के कारण लाखों छात्र बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, और उन्होंने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री से दखल देने का अनुरोध किया।

सोरेन ने प्रधानमंत्री से यह भी आग्रह किया कि वे अल्पसंख्यक छात्रों के लिए ऐसी वित्तीय सहायता फिर से शुरू करने के साथ-साथ मैट्रिक से पहले और मैट्रिक के बाद छात्रवृत्ति के लिए केंद्रीय आवंटन बढ़ाएं।

सोरेन ने पत्र में लिखा, “झारखंड ने 2025-26 में मैट्रिक के बाद छात्रवृत्ति के लिए 370.87 करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने सिर्फ 58.22 करोड़ रुपये जारी किए। इसी तरह, 2024-25 में राज्य की 353.21 करोड़ रुपये की मांग के मुकाबले सिर्फ 33.57 करोड़ रुपये मंजूर किए गए।”

उन्होंने चेतावनी दी कि धन की भारी कमी के कारण लाखों छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति में “देरी” हुई है, जिससे उनकी पढ़ाई पर खतरा मंडरा रहा है।

राज्य के सामने आ रही आर्थिक दिक्कतों का जिक्र करते हुए सोरेन ने कहा कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की पिछड़ी जाति के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत, झारखंड ने 2024-25 में मैट्रिक पूर्व छात्रवृत्ति के लिए 66.14 करोड़ रुपये मांगे थे, लेकिन “केंद्र से सिर्फ 12.61 करोड़ रुपये मिले”।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 2025-26 के लिए राज्य ने 45.91 करोड़ रुपये की मांग की थी, जबकि केवल 3.95 करोड़ रुपये ही जारी किए गए।

सोरेन ने कहा कि सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप, झारखंड ने जाति या समुदाय की पहचान पर निर्भर रहने के बजाय आय पर आधारित छात्रवृत्ति पात्रता की एक पारदर्शी व्यवस्था अपनाई है।

उन्होंने केंद्र के अनुमानित आवंटन पर भी सवाल उठाए और कहा कि राज्य को 2024-25 के लिए सिर्फ़ 23.78 करोड़ रुपये और 2025-26 के लिए 32.70 करोड़ रुपये मिले, जो उसकी असल जरूरतों के हिसाब से बहुत कम थे।

उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि सभी पात्र छात्रों को समय पर छात्रवृत्ति का लाभ सुनिश्चित करने के लिए आवंटन बढ़ाया जाए।

जनजातीय कार्य मंत्रालय के तहत अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं का जिक्र करते हुए, सोरेन ने दावा किया कि 2025-26 के दौरान मैट्रिक से पहले या मैट्रिक के बाद छात्रवृत्ति के लिए कोई केंद्रीय निधि जारी नहीं की गयी है।

उन्होंने कहा कि 2024-25 के दौरान जारी किए गए 200 करोड़ रुपये कोई नयी निधि नहीं थी, बल्कि इसमें 2022-23 का बकाया और 2023-24 के लिए केंद्र के 42 प्रतिशत हिस्से की पहली किस्त शामिल थी।

उन्होंने कहा, “नतीजतन, 2023-24 के लिए बाकी 58 प्रतिशत हिस्सा, साथ ही 2024-25 और 2025-26 के लिए केंद्र का पूरा हिस्सा, अब भी लंबित है।”

भाषा प्रशांत पवनेश

पवनेश


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