श्रीनगर, 12 जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर में 13 जुलाई को मनाए जाने वाले शहीद दिवस से एक दिन पहले रविवार को पुराने शहर स्थित नक्शबंद साहिब कब्रिस्तान की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर नेताओं की आवाजाही रोक दी गई है।
स्थानीय लोग प्रत्येक वर्ष 13 जुलाई को साल 1931 में महाराजा हरि सिंह की सेना की गोलीबारी में मारे गए प्रदर्शनकारियों की स्मृति में शहीद दिवस मनाते हैं।
सोमवार को नेताओं के कब्रिस्तान तक मार्च को रोकने के लिए नौहट्टा क्षेत्र के पास कंटीले तारों, अवरोधक, जीआई शीट और खंभों से घेराबंदी की गई।
प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि यह कदम पिछले वर्ष जैसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। पिछले साल पुलिस द्वारा कब्रिस्तान का मुख्य द्वार बंद किए जाने के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बाड़ फांदकर शहीदों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे।
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में पुलिस, उपराज्यपाल के अधीन कार्य करती है। पिछले वर्ष शहीद दिवस से पहले उमर अब्दुल्ला और कई अन्य नेताओं को नजरबंद कर दिया गया था।
प्रतिबंधों के बावजूद नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला खानयार चौराहे से ऑटो-रिक्शा में बैठकर स्मारक तक पहुंचे, जबकि शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू किसी के साथ स्कूटर पर पीछे बैठकर वहां पहुंचीं, जिससे सभी हैरान रह गए।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कब्रिस्तान का मुख्य द्वार फांदकर ‘फातिहा’ पढ़ा। इसके बाद उनके सुरक्षाकर्मियों और पार्टी के कई अन्य नेताओं ने भी उनका अनुसरण किया, जिसके चलते पुलिस को अंततः कब्रिस्तान का द्वार खोलना पड़ा।
गौरतलब है कि 13 जुलाई, 1931 को श्रीनगर की केंद्रीय जेल के बाहर डोगरा सेना की गोलीबारी में 22 लोगों की मौत हो गई थी।
वर्ष 2020 में उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन ने 13 जुलाई को राजपत्रित अवकाशों की सूची से हटा दिया था।
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