नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) दिल्ली पुलिस ने नकली जीवनरक्षक दवाएं बनाने और आपूर्ति में शामिल एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है और लगभग दो करोड़ रुपये की नकली दवाएं जब्त की गई हैं। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।
इस अभियान के दौरान पुलिस ने फर्जी जीएसटी कंपनियों के एक नेटवर्क का भी पर्दाफाश किया, जिनका इस्तेमाल फर्जी चालान बनाने और अवैध व्यापार से प्राप्त धन को शोधन करने के लिए किया जाता था। जांचकर्ताओं का अनुमान है कि फर्जी बिलिंग लगभग 50 करोड़ रुपये की थी।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बड़े पैमाने पर आमतौर पर मधुमेह, उच्च रक्तचाप और यकृत संबंधी विकारों जैसी बीमारियों के लिए दी जाने वाली शेड्यूल-एच की नकली दवाओं के निर्माण, भंडारण और वितरण में शामिल था जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा होता है।
आरोपियों की पहचान शाहदरा के थोक दवा व्यापारी निखिल अरोरा उर्फ सनी, उत्तर प्रदेश के आपूर्तिकर्ता शिवम त्यागी और मयंक अग्रवाल, उत्तराखंड के प्रमुख आपूर्तिकर्ता मोहित कुमार शर्मा और शाहरुख और राहुल के रूप में हुई है, जिन्होंने कथित तौर पर अवैध व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए फर्जी जीएसटी कंपनी चलाईं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘विशिष्ट सूचनाओं के आधार पर यह मामला सामने आया, जिसके बाद 11 मार्च को शाहदरा के बिहारी कॉलोनी में छापेमारी की गई। इस कार्रवाई के दौरान भागीरथी पैलेस में थोक दवाई की दुकान चलाने वाले अरोरा को पकड़ा गया।’
उन्होंने कहा कि छापेमारी के दौरान 1.2 लाख से अधिक नकली गोलियां और कैप्सूल बरामद किए गए, जिनमें रैबेमैक-डीएसआर, टेल्मा-एएम, स्पोरोलैक-डीएस, सिग्नोफ्लैम, काइमोरल फोर्ट, उर्सोकोल-300, ग्लूकोनॉर्म, जलरा-50 और कई अन्य व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं के नकली संस्करण शामिल हैं।
उन्होंने आगे कहा, ‘इस तरह की नकली दवाओं का प्रचलन गंभीर और घातक परिणाम दे सकता है।’
अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच जारी है।
भाषा शुभम रंजन
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