स्वस्थ पर्यावरण के लिए कड़े वायु गुणवत्ता मानक जरूरी: संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ

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स्वस्थ पर्यावरण के लिए कड़े वायु गुणवत्ता मानक जरूरी: संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ

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  • Publish Date - March 12, 2026 / 01:52 PM IST,
    Updated On - March 12, 2026 / 01:52 PM IST

(अपर्णा बोस)

नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषज्ञ ने कहा है कि स्वस्थ पर्यावरण के मानवाधिकार की रक्षा के लिए वायु गुणवत्ता मानकों को मजबूत करना और औद्योगिक एवं ऊर्जा उत्सर्जन का कड़ा विनियमन सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ पर्यावरण के मानव अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र की विशेषज्ञ एस्ट्रिड पुएंटेस रियानो ने हाल में जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में एक नयी रिपोर्ट पेश की। उन्होंने सरकारों एवं उद्योगों से वायु प्रदूषण के कारण होने वाले जन स्वास्थ्य एवं मानवाधिकार संकट का समाधान निकालने का आह्वान किया।

रियानो ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक बयान में कहा कि विभिन्न देश वायु प्रदूषण के कारण मानवाधिकारों पर पड़ने वाले प्रभावों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने ‘राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक’ (एनएक्यूआई) और ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम’ (एनसीएपी) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से इस दिशा में कदम उठाए हैं।

उन्होंने कहा, ‘स्वस्थ पर्यावरण के मानव अधिकार की रक्षा और प्रदूषित हवा के संपर्क में आने वाले लाखों लोगों के स्वास्थ्य और अन्य अधिकारों की सुरक्षा के लिए वायु गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने और उन्हें उपलब्ध सर्वोत्तम विज्ञान के अनुरूप बनाने के साथ औद्योगिक तथा ऊर्जा उत्सर्जन पर कड़ा नियंत्रण रखना बेहद जरूरी है।’

यूएनएचआरसी को छह मार्च को प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में आतिशबाजी करने से वायु गुणवत्ता बेहद खराब हो सकती है और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकती है, जैसा दिल्ली और मेक्सिको सिटी में देखा गया है।

जिनेवा में 61वें यूएनएचआरसी सत्र के दौरान नागरिक समाज का प्रतिनिधित्व कर रहीं भवरीन कंधारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि विश्व की लगभग पूरी आबादी ऐसी हवा में सांस ले रही है जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों पर खरी नहीं उतरती। उन्होंने कहा कि यदि सरकारें इन मानकों को कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं बनाती हैं तो वे एक तरह से उन बीमारियों और मौतों को बढ़ावा दे रही होती हैं जिन्हें रोका जा सकता है।

भाषा

प्रचेता माधव

माधव