उच्चतम न्यायालय ने जीवन रक्षक दवाइओं से जुड़े मामले का स्वतः संज्ञान लिया
उच्चतम न्यायालय ने जीवन रक्षक दवाइओं से जुड़े मामले का स्वतः संज्ञान लिया
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने जीवनरक्षक दवाइयों तक लोगों की पहुंच और जीवन के अधिकार से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने के मुद्दे पर शुक्रवार को स्वतः संज्ञान लिया।
यह मामला केरल की एक महिला से संबंधित है। वह स्तन कैंसर से पीड़ित थीं। उन्होंने इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों की अत्यधिक कीमतों को चुनौती देते हुए केरल उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। हालांकि, उच्च न्यायालय में याचिका लंबित रहने के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
इस विषय का स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उल्लेख किया कि केरल उच्च न्यायालय में पेटेंट वाली कैंसर-रोधी दवाइओं की वहनीयता से जुड़ा मामला लंबित है।
शीर्ष अदालत ने मामले में नोटिस जारी करते हुए केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से कहा कि वह इस मामले का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करें।
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत को बताया गया कि उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने वाली महिला की मृत्यु हो चुकी है।
उच्च न्यायालय में यह याचिका एर्नाकुलम की रहने वाली महिला ने 2022 में दायर की थी।
महिला की मृत्यु के बाद, केरल उच्च न्यायालय ने इसमें व्यापक जनहित को देखते हुए कार्यवाही स्वतः जारी रखने का निर्णय लिया और मामले का शीर्षक बदलकर ‘जीवनरक्षक पेटेंट दवाइओं की अत्यधिक कीमतों के मामले में’ कर दिया।
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश

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