उच्चतम न्यायालय भ्रष्टाचार के नए मामले में बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा

उच्चतम न्यायालय भ्रष्टाचार के नए मामले में बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा

उच्चतम न्यायालय भ्रष्टाचार के नए मामले में बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा
Modified Date: July 30, 2026 / 07:03 pm IST
Published Date: July 30, 2026 7:03 pm IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (टासमैक) के कामकाज में कथित अनियमितताओं से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मंत्री और द्रमुक नेता वी. सेंथिल बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई।

इससे पहले, मद्रास उच्च न्यायालय ने सतर्कता और भ्रष्टाचार रोधी निदेशालय (डीवीएसी) द्वारा टासमैक मामले में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

अग्रिम जमानत से इनकार किए जाने के तुरंत बाद, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी और अमित आनंद तिवारी ने द्रमुक नेता की ओर से तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि बालाजी के खिलाफ कभी भी दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

पीठ ने कहा कि इस मामले को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

बालाजी तमिलनाडु विधानसभा में कोयंबटूर दक्षिण का प्रतिनिधित्व करते हैं।

नयी प्राथमिकी के अनुसार, टासमैक में शराब की दुकानों और बार के आवंटन में बड़े पैमाने पर कथित घोटाला हुआ है।

बालाजी का आरोप है कि इस प्राथमिकी में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हलफनामे और धनशोधन मामले में जांच एजेंसी द्वारा उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका की सामग्री को हूबहू उद्धृत किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि वास्तव में प्राथमिकी में कई स्थानों पर उल्लेख किया गया है कि उसमें दी गई सामग्री ईडी के जवाबी हलफनामे और उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका से ली गई है।

वरिष्ठ अधिवक्ता तिवारी ने कहा, ‘‘हमारी दलील है कि प्राथमिकी 2021 से 2025 के बीच हुई घटनाओं से संबंधित है। मेरे मुवक्किल के फरार होने की कोई आशंका नहीं है और उनसे हिरासत में पूछताछ की भी आवश्यकता नहीं है। वह विभाग के मंत्री थे, जबकि टासमैक एक स्वतंत्र अस्तित्व और कार्यप्रणाली वाला निगम है।’’

उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में बालाजी की कोई प्रत्यक्ष भूमिका या संबंध नहीं है और यह राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ‘‘यह उच्चतम न्यायालय में लंबित कार्यवाही में हस्तक्षेप भी है। टासमैक और तमिलनाडु सरकार की ओर से दायर याचिका, जिसमें ईडी ने जवाबी हलफनामा दाखिल किया है और जो इस प्राथमिकी का आधार है, उसमें टासमैक के खिलाफ जांच पर रोक तथा किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश है। ऐसे में लंबित मामले के हलफनामे के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करना न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप के समान है।’’

याचिका में कहा गया है कि इस मामले में राज्य सरकार का मौजूदा रुख उसके पहले अपनाए गए रुख के बिल्कुल विपरीत है।

उच्च न्यायालय ने बालाजी पर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के अभियोजन पक्ष के आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि मामले की जांच के लिए उनसे हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।

डीवीएसी ने अपनी प्राथमिकी में कहा है कि बालाजी ने टासमैक के कामकाज में हेरफेर करने के लिए आपराधिक साजिश रची। इसके तहत बार लाइसेंस और परिवहन ठेकों की निविदाओं में धांधली की गई, कुछ चुनिंदा शराब निर्माताओं को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिससे शराब की कीमतें बढ़ीं और सरकारी खजाने को वित्तीय नुकसान हुआ। डीवीएसी ने इस मामले में सात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

बालाजी, टासमैक के पूर्व प्रबंध निदेशक एस. विसाकन और पांच अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में बार लाइसेंस आवंटन, परिवहन ठेकों तथा कुछ डिस्टिलरी और बॉटलिंग कंपनियों द्वारा कथित फर्जी एवं बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए लेनदेन के जरिए धन के गबन, खरीद प्रक्रिया और निविदा प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप लगाए गए हैं।

अन्य पांच आरोपियों में बालाजी के करीबी सहयोगी राथेश राज षणमुगावेल और एस. कार्तिक (उर्फ मुलानूर कार्तिक), उनके पूर्व निजी सहायक भास्कर तथा टासमैक के पूर्व अधिकारी आर. रामदुरई मुरुगन और आर. पनीरसेल्वम शामिल हैं।

प्राथमिकी में ‘‘करूर गैंग’’ नामक एक कथित संगठित गिरोह के संचालन का उल्लेख किया गया है, जिस पर कार्तिक का नियंत्रण होने का आरोप है।

आरोप है कि यह गिरोह करूर जिले के सभी शराब बार संचालित करता था और अधिकारियों पर दबाव डालकर पूरे तमिलनाडु में अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को बार लाइसेंस आवंटित कराता था। प्राथमिकी में करोड़ों रुपये के एक सुनियोजित नकद कमीशन तंत्र का भी उल्लेख किया गया है। इसके तहत बोतल आपूर्ति करने वाली कंपनियां डिस्टिलरी के नाम पर फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर बिल बनाती थीं।

भाषा आशीष पवनेश

पवनेश


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