(फाइल फोटो के साथ)
चेन्नई, 18 जनवरी (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने तमिल, तेलुगु, बांग्ला और मराठी सहित विभिन्न भाषाओं में सर्वश्रेष्ठ कृतियों के लिए वार्षिक साहित्य पुरस्कार की रविवार को घोषणा की और साहित्य अकादमी पुरस्कारों में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप के लिए केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की।
स्टालिन ने बताया कि राज्य सरकार के तत्वावधान में दिए जाने वाले इस पुरस्कार में पांच लाख रुपये का नकद पुरस्कार शामिल होगा और इसका नाम “सेमोई इलक्किया विरुद्धु (शास्त्रीय भाषा साहित्य पुरस्कार)” रखा गया है।
उन्होंने बताया कि पहले चरण में तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, उड़िया, बांग्ला और मराठी भाषा की सर्वश्रेष्ठ कृतियों के लिए पुरस्कार दिए जाएंगे।
चेन्नई अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले (सीआईबीएफ-2026) के समापन समारोह में अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य अकादमी पुरस्कारों की घोषणा हाल में रद्द कर दी गई थी और यह निराशाजनक था। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के हस्तक्षेप के कारण हुआ।
पुरस्कारों को लेकर व्याप्त अनिश्चितता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘कला और साहित्य पुरस्कारों में राजनीतिक हस्तक्षेप खतरनाक है।’
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परिस्थितियों में कई लेखकों और कला/साहित्यिक निकायों के प्रतिनिधियों ने उनसे एक उपयुक्त, रचनात्मक, जवाबी योजना के लिए अपील की थी।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार की ओर से प्रत्येक वर्ष चुनिंदा भारतीय भाषाओं में सर्वश्रेष्ठ साहित्यिक कृतियों के लिए ‘राष्ट्रीय स्तर’ के पुरस्कार दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे यह घोषणा करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि पहले चरण में, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, उडिया, बांग्ला और मराठी भाषाओं में सर्वश्रेष्ठ कृतियों के लिए “सेमोई इलक्किया विरुद्धु पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। प्रत्येक भाषा की कृति के लिए पांच लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।”
तमिलनाडु सरकार संरक्षक की भूमिका सहर्ष निभाएगी और चयन प्रक्रिया का कार्य स्वतंत्र विशेषज्ञों को सौंपेगी।
स्टालिन ने कहा, ‘साहित्यिक कृतियों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, प्रत्येक भाषा के लिए एक समिति (पुरस्कार विजेताओं का चयन करने के लिए) गठित की जाएगी, जिसमें प्रतिष्ठित लेखक शामिल होंगे।’
स्टालिन ने कहा कि उनके नेतृत्व वाली सरकार ने हर घर तक ज्ञान पहुंचाने के लिए कई पहल की हैं और पुस्तक मेला एक महत्वपूर्ण कदम है।
भाषा आशीष सुरेश
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