चेन्नई, 30 जुलाई (भाषा) तमिलनाडु सरकार ने मजबूत ‘अल नीनो’ के संभावित प्रभावों की वैज्ञानिक आधार पर निगरानी एवं आकलन करने तथा उपयुक्त एहतियाती एवं आपदा प्रबंधन उपाय सुझाने के लिए एक विशेषज्ञ सलाहकार समिति गठित करने की बृहस्पतिवार को घोषणा की।
समिति में जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण, तटीय संसाधन प्रबंधन और शहरी बुनियादी ढांचे समेत विभिन्न क्षेत्रों में विशेष अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ शामिल हैं।
यह कदम राजस्व प्रशासन के अपर मुख्य सचिव एवं आयुक्त की उस चेतावनी के बाद उठाया गया है, जिसमें कहा गया था कि 2026 में भीषण ‘अल नीनो’ विकसित होने की आशंका बहुत अधिक है।
नतीजतन, दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश सामान्य से कम हो सकती है, जिससे कावेरी नदी में पानी की आवक और सिंचाई सुविधाओं पर असर पड़ सकता है।
सरकार ने कहा कि इसके अलावा, पूर्वोत्तर मानसून सीजन के दौरान भारी बारिश और बाढ़ जैसी गंभीर मौसम की घटनाओं की आशंका है। इसलिए, मजबूत अल-नीनो से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए, इस पर तमिलनाडु आपदा जोखिम न्यूनीकरण एजेंसी (टीएनडीआरआरए) को सलाह देने के लिए एक विशेषज्ञ सलाहकार समिति बनाने का प्रस्ताव है।
इसके अनुसार, 28 जुलाई को एक सरकारी आदेश जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि अतिरिक्त मुख्य सचिव/राजस्व प्रशासन आयुक्त और राज्य राहत आयुक्त, चेपॉक, समिति के अध्यक्ष होंगे।
समिति में विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञ होंगे।
सरकारी आदेश में कहा गया, “यह समिति बारिश और सूखे की स्थिति पर नजर रखेगी, जोखिम वाले इलाकों की पहचान करेगी और तमिलनाडु आपदा जोखिम न्यूनीकरण एजेंसी को शुरुआती चेतावनी प्रणालियों के बारे में सलाह देगी। समिति संवेदनशील इलाकों में सूखे और बाढ़ से निपटने के उपायों पर सलाह देगी, ताकि किसी भी तरह की आपदा का सामना करने के लिए समय रहते पूरी तैयारी सुनिश्चित की जा सके।”
यह समिति टीएनडीआरआरए में 2026-27 और 2027-28 की अवधि के लिए काम करेगी।
भाषा प्रशांत पवनेश
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