(गुंजन शर्मा)
नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) ‘गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट’ (जीआईएम) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में पाया गया कि टेलीमेडिसिन में समान लिंग के चिकित्सक से परामर्श मिलने पर रोगी की संतुष्टि कम हो सकती है।
इस अध्ययन ने ऑनलाइन स्वास्थ्य देखभाल मंचों पर सांस्कृतिक रूप से जागरूक और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोणों की आवश्यकता पर बल दिया।
पहले किए गए अध्ययनों में पाया गया था कि समान लिंग के चिकित्सकों से आमने-सामने बात करने पर रोगियों की संतुष्टि का स्तर अधिक होता है।
इसके विपरीत, नए अध्ययन में पाया गया कि डिजिटल परामर्श के दौरान चिकित्सक और रोगी के बीच लिंग की समानता रोगी की संतुष्टि को कम कर सकती है।
इस अध्ययन के निष्कर्ष प्रतिष्ठित ‘जर्नल ऑफ मेडिकल इंटरनेट’ रिसर्च में प्रकाशित हुए हैं।
जीआईएम की सहायक प्रोफेसर नफीसा वाज के अनुसार, यह शोध भारत के सांस्कृतिक रूप से जटिल स्वास्थ्य सेवा परिवेश में अब तक अनछुए रहे क्षेत्र में साक्ष्य-आधारित निष्कर्ष प्रस्तुत करता है।
समान लिंग के चिकित्सक के साथ आमने-सामने बैठकर परामर्श को विश्वास और संतुष्टि से जोड़ा जाता रहा है लेकिन भारत में टेलीमेडिसिन के संदर्भ में इसका पहले अध्ययन नहीं किया गया था।
जनवरी 2023 से दिसंबर 2024 तक की अवधि के दौरान किये गये राष्ट्रव्यापी टेलीमेडिसिन अध्ययन में 2,86,196 रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया।
यह ग्लोबल साउथ में लिंग और टेलीमेडिसिन पर किए गए सबसे बड़े अध्ययनों में से एक है और इसमें 20 चिकित्सा विशिष्टताओं को शामिल किया गया है।
नफीसा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “शोध दल ने यह भी पता लगाया कि क्या समान लिंग के चिकित्सक का मिलना रोगी की संतुष्टि और नैदानिक सुधार को प्रभावित करता है, जैसा कि रोगियों ने सर्वेक्षण में स्वयं बताया है। विश्लेषण में परामर्श की अवधि, परामर्श का समय और चिकित्सक के प्रशिक्षण स्तर को ध्यान में रखा गया लेकिन पाया गया कि ये इतना महत्व नहीं रखते।”
शोध दल ने पाया कि 2,86,196 रिकॉर्ड में से 60.4 प्रतिशत समान लिंग के चिकित्सक से मुखातिब हुए।
नफीसा ने कहा, “समान लिंग के चिकित्सक से परमार्श करने वाले रोगियों की संतुष्टि नकारात्मक रही। पुरुष रोगियों में ‘अपेक्षा-आश्चर्य’ प्रभाव देखा गया, जिन्होंने महिला चिकित्सकों द्वारा उपचार किए जाने पर अधिक संतुष्टि व्यक्त की।”
उन्होंने कहा, “स्त्रीरोग विज्ञान में महिला रोगियों को महिला चिकित्सकों से परामर्श लेने पर उनके सफल उपचार की संभावना 4.5 गुना अधिक पाई गई।”
भाषा जितेंद्र संतोष
संतोष