शहीदों के कब्रिस्तान तक जाने का रास्ता रोकने वाले ‘अस्थायी’, आज़ादी के लिए कुर्बानियां अमर हैं: उमर

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शहीदों के कब्रिस्तान तक जाने का रास्ता रोकने वाले ‘अस्थायी’, आज़ादी के लिए कुर्बानियां अमर हैं: उमर

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  • Publish Date - July 13, 2026 / 04:52 PM IST,
    Updated On - July 13, 2026 / 04:52 PM IST

श्रीनगर, 13 जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को पुराने शहर स्थित शहीदों के कब्रिस्तान तक पहुंच पर रोक लगाए जाने को लेकर उपराज्यपाल प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोगों को शहीदों को श्रद्धांजलि देने से रोकने वाले “कुछ दिनों के मेहमान” हैं, जबकि शहीद हमेशा अमर रहेंगे।

अब्दुल्ला ने यहां नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, “जिन लोगों ने आज हमें शहीदों के कब्रिस्तान नहीं जाने दिया, वे कुछ दिनों के मेहमान हैं। वे कल यहां नहीं होंगे। लेकिन शहीदों की कब्रें-वे यहां थीं, वे यहां हैं और वे हमेशा यहीं रहेंगी।”

पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला समेत नेकां के वरिष्ठ नेता 13 जुलाई, 1931 के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए पार्टी मुख्यालय में इकट्ठा हुए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग शहीदों के कब्रिस्तान में फिर जाएंगे, “आज नहीं तो कल, हम वहां फिर जाएंगे, फूल चढ़ाएंगे और शहीदों के लिए फातिहा (प्रार्थना) पढ़ेंगे।”

श्रीनगर के केंद्रीय कारागार के बाहर 13 जुलाई 1931 को डोगरा सेना ने 22 लोगों को गोली मार दी थी।

उपराज्यपाल प्रशासन ने 2020 में इस दिन को सरकारी छुट्टियों की सूची से हटा दिया था।

अब्दुल्ला ने कहा कि ये लोग तानाशाही शासन के खिलाफ लोकतंत्र के लिए लड़ते हुए शहीद हुए।

उन्होंने कहा, “काश, जिन्होंने शहीदों के कब्रिस्तान को बंद करने का फैसला लिया, उन्होंने जम्मू-कश्मीर का इतिहास पढ़ा होता; तो वे समझ जाते कि इस फैसले से उन्होंने उन सभी लोगों की कुर्बानियों को नजरअंदाज किया है जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ते हुए अपनी जान दी थी।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “उस समय कश्मीर ब्रिटिश आधिपत्य के अधीन एक रियासत था। महाराजा ने ब्रिटिश सर्वोच्चता स्वीकार कर ली थी।”

भाषा

प्रशांत नेत्रपाल

नेत्रपाल