एमएससी को हिस्सेदारी बेचने की अदाणी की योजना के बीच थरूर ने पूर्व की सुरक्षा चिंताओं का जिक्र किया

Ads

एमएससी को हिस्सेदारी बेचने की अदाणी की योजना के बीच थरूर ने पूर्व की सुरक्षा चिंताओं का जिक्र किया

  •  
  • Publish Date - July 3, 2026 / 02:28 PM IST,
    Updated On - July 3, 2026 / 02:28 PM IST

तिरुवनंतपुरम, तीन जुलाई (भाषा) ‘अदाणी विड़िण्गम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड’ (एवीपीपीएल) में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी स्विट्जरलैंड की प्रमुख पोत परिवहन कंपनी ‘मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी’ (एमएससी) को बेचने के प्रस्ताव पर जारी विवाद के बीच कांग्रेस नेता एवं सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि चीनी कंपनियों की संभावित भागीदारी को लेकर चिंताओं के कारण संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग), दोनों की सरकारों के दौरान इस परियोजना के लिए कई बार बोली लगाने वाले नहीं मिल पाए थे।

तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने कहा कि हिस्सेदारी के किसी भी हस्तांतरण के लिए केंद्र और केरल सरकार, दोनों की सहमति जरूरी होगी क्योंकि यह बंदरगाह राष्ट्रीय महत्व की रणनीतिक संपत्ति है और राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है।

उन्होंने कहा, ‘‘आपको याद होगा कि परियोजना के लिए निविदा को मंजूरी मिलने से पहले, चीनी कंपनियों की संभावित भागीदारी के कारण बोली प्रक्रिया तीन-चार बार सफल नहीं हो पाई थी।’’

थरूर ने कहा, ‘‘इसी वजह से केंद्र की कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों की सरकारों ने मंजूरी नहीं दी थी। इसलिए, सरकारों की सहमति के बिना कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जाना चाहिए। मेरा भी यही विचार है।’’

उन्होंने कहा कि कोई भी बंदरगाह की प्रगति और विकास के खिलाफ नहीं है लेकिन इसे राज्य सरकार के साथ किए गए रियायत समझौते के अनुरूप आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

थरूर ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, ‘‘केंद्र और राज्य सरकार, दोनों से संबंधित मंजूरियां मिलने के बाद ही हिस्सेदारी की ऐसी बिक्री या हस्तांतरण को मंजूरी दी जा सकती है। यही सामान्य कानूनी प्रक्रिया है। मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन और विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने भी यही कहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए प्रक्रिया को आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए।’’

थरूर ने कहा कि इस बंदरगाह से राज्य का भी हित जुड़ा है क्योंकि उसने इसके लिए जमीन दी है और इसका निर्माण दुनिया की सभी पोत परिवहन कंपनियों की जरूरतें पूरी करने के उद्देश्य से किया गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए कि यहां केवल एमएससी के पोत ही आ सकें। हम चाहते हैं कि यह बंदरगाह कई पोत परिवहन कंपनियों के लिए खुला रहे।’’

थरूर ने साथ ही स्पष्ट किया कि किसी का भी विरोध नहीं किया जा रहा है और बंदरगाह का विकास जरूरी है।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन विकास कानून के अनुरूप और रियायत समझौते की शर्तों का सम्मान करते हुए होना चाहिए। आगे बढ़ने का यही एकमात्र रास्ता है। सरकार सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद फैसला करेगी।’’

राज्य के उद्योग मंत्री पी. के. कुन्हालीकुट्टी ने कहा कि किसी को केवल विवादों के आधार पर निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सतीशन पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अदाणी समूह की ओर से हिस्सेदारी हस्तांतरण के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

कुन्हालीकुट्टी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने भी कहा है कि इस घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी, जिनमें यह भी शामिल है कि यह सौदा राज्य के लिए नुकसानदेह होगा या लाभकारी।’’

सतीशन ने ‘अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन’ (एपीएसईजेड) द्वारा सरकार को सूचित किए बिना विड़िण्गम बंदरगाह में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी स्विट्जरलैंड की पोत परिवहन कंपनी एमएससी को हस्तांतरित करने की घोषणा पर बृहस्पतिवार को अपनी सरकार की नाराजगी जताई थी।

एपीएसईजेड ने मंगलवार को घोषणा की थी कि एमएससी करीब 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर में अदाणी विड़िण्गम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी।

भाषा

सिम्मी नेत्रपाल

नेत्रपाल