मलप्पुरम (केरलम), 13 सितंबर (भाषा) महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी को लेकर अपनी टिप्पणियों के कारण विवादों में घिरे इस्लामिक विद्वान कांतापुरम ए पी अबूबकर मुसलियार ने कहा है कि ‘समस्त केरल जमिय्यतुल उलमा’ के फरमानों को किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के लिए बदला नहीं जा सकता।
पिछले महीने ‘समस्त केरल जमिय्यतुल उलमा’ के अध्यक्ष ई सुलेमान मुसलियार और महासचिव कांतापुरम ने एक परिपत्र जारी कर फरमान सुनाया था कि महिलाओं को पुरुषों के साथ मंच साझा नहीं करना चाहिए या उनके साथ सार्वजनिक स्थानों पर नहीं आना चाहिए।
इस परिपत्र की आलोचना हुई और केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन सहित कई नेताओं ने इसके खिलाफ आवाज उठाई।
शनिवार को यहां चेम्मड में एक कार्यक्रम में कांतापुरम ने कहा कि ‘समस्त केरल जमिय्यतुल उलमा’ सुन्नियों और उनकी गतिविधियों का मार्गदर्शन और नियंत्रण करने वाली सर्वोच्च इस्लामिक संस्था है और यह कयामत के दिन तक अपना काम जारी रखेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मैं आप सभी को याद दिलाना चाहता हूं कि हर किसी को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए और इसके बने रहने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। अगर वह महान संस्था यहां नहीं होती, तो यहां कोई भी आस्थावान व्यक्ति नहीं होता। उस संस्था के अस्तित्व के कारण ही आज यहां इतनी बड़ी संख्या में सुन्नी मौजूद हैं।’’
उन्होंने कहा कि यह संस्था किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की पसंद या प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए काम नहीं करती, बल्कि हर स्थिति में क्या जरूरी है, इसका आकलन करने के बाद ही फैसले लेती है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह कुछ खास लोगों की पसंद या प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए काम नहीं करती है। बल्कि, हम हर स्थिति में क्या जरूरी है इसका मूल्यांकन करके काम करते हैं। इस प्रयास में आप सभी अब तक उलमा के साथ खड़े रहे हैं।’’
कांतापुरम ने कहा कि किसी के लिए भी उलमा के फैसलों में बाधा डालना या उन्हें पलटना असंभव है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा रवैया कभी भी किसी व्यक्ति या किसी अन्य पार्टी के लिए फैसलों को बदलने का नहीं रहा है। हम व्यापक विचार-विमर्श करते हैं, गहराई से सोचते हैं, धर्मग्रंथों की जांच करते हैं और इसी तरह हम यहां फैसला सुनाते हैं-जिस तरह ‘समस्त केरल जमिय्यतुल उलमा’ फैसला सुनाती है।’’
भाषा सुरभि शोभना
शोभना